तिब्बत सीमा से लगे मध्य नेपाल के इलाकों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक और 37 प्रवासी भारतीय भी शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आने से रसुवा और धादिंग जिले बुरी तरह प्रभावित हुए। इसके बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट और चितवन तक पहुंच गया। कई गांवों और शहरों में पानी और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया। कम से कम चार स्थायी पुल और कई अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे भारतीय भी लापता
इस हादसे ने भारतीय तीर्थयात्रियों की चिंता भी बढ़ा दी है। रसुवा जिले में लापता 341 विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों में 133 भारतीय और 37 प्रवासी भारतीय शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या उन भारतीयों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे।
सम्राट टूर एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों में शामिल हैं।
भूस्खलन और भूकंप से जुड़ी आशंका
उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पहाड़ी चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। वहीं, काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग इसी समय तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया था।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, चट्टान खिसकने और सीमा क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक पहुंच गया।
खतरा अभी टला नहीं
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने चेतावनी दी है कि नदी का रास्ता अवरुद्ध होने के कारण बनी झील का पानी अभी पूरी तरह नहीं निकला है। ऐसे में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से नदी से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान
हादसे के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। नेपाल सेना ने खोज और बचाव अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। प्रभावित लोगों के लिए त्रिशूली में उपचार केंद्र भी स्थापित किया गया है।
अब तक अलग-अलग इलाकों से 93 लोगों को बचाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनमें करीब 30 लोगों का काठमांडू के अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बाढ़ से सड़क, पुल, सीमा शुल्क परिसर और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
भारतीय दूतावास ने जारी की हेल्पलाइन
नेपाल में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने के बाद काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने सहायता और जानकारी के लिए हेल्पलाइन जारी की है। दूतावास ने बताया कि वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नागरिकों के बचाव एवं राहत कार्यों को लेकर समन्वय किया जा रहा है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान पर दुख जताया है।
USTV Rudrapur लगातार इस बड़े प्राकृतिक आपदा घटनाक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण अपडेट पर नजर बनाए हुए है।

