15 सितंबर के बाद उत्तराखंड में उतरेंगे कांग्रेस के तीन दिग्गज
राहुल-प्रियंका-खरगे गढ़वाल और कुमाऊं में करेंगे चुनावी दौरे
दिल्ली में बनी रणनीति अब पहाड़ के मैदान में आजमाने की तैयारी
देहरादून। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उत्तराखंड कांग्रेस अब अपने शीर्ष नेतृत्व को मैदान में उतारने की तैयारी में है। 15 सितंबर के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे उत्तराखंड का दौरा करेंगे। गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में राष्ट्रीय नेताओं के कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
राष्ट्रीय नेतृत्व के दौरे की रणनीति को लेकर बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ आगामी पार्टी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के साथ हुई बैठक में चुनाव की तैयारियों और संगठनात्मक कार्यक्रमों पर मंथन हुआ। बैठक में तय किया गया कि आने वाले समय में पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की सक्रियता उत्तराखंड में बढ़ाई जाएगी।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के प्रस्तावित दौरे को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस की कोशिश है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी के जरिए प्रदेश में चुनावी माहौल को अपने पक्ष में गति दी जाए और कार्यकर्ताओं में भी नई ऊर्जा पैदा की जाए। गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रें में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। हालांकि अभी कार्यक्रमों की अंतिम तारीख तय नहीं हुई है। पार्टी की ओर से जल्द ही कार्यक्रमों का विस्तृत कार्यक्रम जारी किए जाने की बात कही गई है।
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कांग्रेस के तीन शीर्ष नेताओं का एक साथ प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी जहां राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के प्रमुख चेहरे के रूप में चुनावी मुद्दों को धार देने में जुटे हैं, वहीं प्रियंका गांधी की जनसभाएं और खरगे का संगठनात्मक अनुभव कांग्रेस के अभियान को अलग-अलग स्तर पर मजबूती दे सकता है।
अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के इन दौरों को कांग्रेस किस मुद्दे और किस राजनीतिक संदेश के साथ उत्तराखंड की जनता के बीच लेकर जाती है। गढ़वाल और कुमाऊं में शीर्ष नेताओं की मौजूदगी क्या कांग्रेस के चुनावी अभियान को नई धार दे पाएगी, यही आने वाले दिनों में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल होगा।

