पद्म भूषण से सम्मानित हुए ‘भगत दा’,जनसेवा, राष्ट्रवाद और उत्तराखंड आंदोलन के समर्पित चेहरे को देश का तीसरा सर्वाेच्च नागरिक सम्मान
उत्तराखण्ड सत्य,नई दिल्ली
नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य नागरिक अलंकरण समारोह में उस समय उत्तराखंड के लिए गौरव का विशेष क्षण उपस्थित हुआ, जब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को लोकसेवा और सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घ योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किया। वर्षों से जनसेवा, संगठन, शिक्षा और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे भगत सिंह कोश्यारी को यह सम्मान मिलने के बाद पूरे उत्तराखंड में उत्साह और गर्व का माहौल दखने को मिला। राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित इस समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र सरकार के अनेक वरिष्ठ मंत्री और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। समारोह के दौरान वर्ष 2026 के लिए विभिन्न क्षेत्रें में उल्लखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार शामिल रहे। उत्तराखंड में फ्भगत दाय् के नाम से लोकप्रिय भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष, सादगी और समर्पण की ऐसी कहानी है, जिसने उन्हें पहाड़ के गांवों से निकालकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचाया। बागेश्वर जिले के सुदूर पर्वतीय गांव पलानधुरा में 17 जून 1942 को जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और अपने शुरुआती जीवन में शिक्षक के रूप में कार्य किया। शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता ने उन्हें जल्द ही सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों की ओर अग्रसर कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक समर्पित स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने संगठनात्मक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। सादगीपूर्ण जीवनशैली, अनुशासित व्यक्तित्व और राष्ट्रवादी विचारधारा के कारण वे शीघ्र ही जनमानस के बीच लोकप्रिय हो गए। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी उन्होंने वैचारिक और राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बनी पहली सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी मिली और बाद में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री का दायित्व भी संभाला। यद्यपि उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक सादगी ने उन्हें जनता के बीच विशेष पहचान दिलाई। राजनीतिक जीवन में भगत सिंह कोश्यारी ने विधान परिषद सदस्य, विपक्ष के नेता, राज्यसभा सांसद और लोकसभा सांसद के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 2019 में उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उन्होंने लंबे समय तक कार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संवैधानिक जिम्मेदारियों के बावजूद उनकी पहचान हमेशा एक सरल, सहज और पहाड़ से जुड़े जननेता की बनी रही। राजनीति और संगठनात्मक जीवन के साथ-साथ भगत सिंह कोश्यारी एक चिंतक और लखक के रूप में भी जाने जाते हैं। उत्तराखंड राज्य की अवधारणा, संघर्ष और विकास को लेकर लिखी गई उनकी पुस्तकें फ्उत्तरांचल प्रदेश क्योंय् और फ्उत्तरांचल प्रदेशरू संघर्ष एवं समाधानय् आज भी राज्य आंदोलन और विकास विमर्श से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती हैं। इन पुस्तकों में उन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास की परिकल्पना प्रस्तुत की थी। भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित राज्य के अनेक जनप्रतिनिधियों,सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इसे पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि भगत दा का जीवन सार्वजनिक सेवा, राष्ट्रभक्ति और जनसमर्पण की प्रेरक मिसाल है। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी इस सम्मान को उत्तराखंड की अस्मिता और योगदान का राष्ट्रीय सम्मान बताया। पलानधुरा के एक साधारण पहाड़ी परिवार से निकलकर राष्ट्रपति भवन में पद्म भूषण ग्रहण करने तक का यह सफर केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस उत्तराखंड की कहानी भी है जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद देश कोअनेक समर्पित जननेता, सैनिक, शिक्षक और कर्मयोगी दिए हैं। भगत दा का सम्मान इसी परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली नई पहचान के रूप में दखा जा रहा है।
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