निगमों, परिषदों और आयोगों में नियुक्तियों से संगठन को साधने की कोशिश, सामाजिक समीकरणों पर भी नजर
उत्तराखण्ड सत्य,देहरादून
उत्तराखंड में चुनावी आहट के बीच धामी सरकार ने संगठन और सत्ता के बीच तालमेल को और मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। लंबे समय से दायित्वों की प्रतीक्षा कर रहे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सरकार ने नियुक्तियों का पिटारा खोल दिया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार विभिन्न निगमों, परिषदों, आयोगों और समितियों में जिम्मेदारियां बांटी जा रही हैं। सरकार के इस कदम को जहां भाजपा संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की पहल बता रही है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा न केवल अपने पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश कर रही है, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर भी आगे बढ़ रही है। ताजा नियुक्तियों में कई प्रमुख चेहरों को जगह दी गई है। भाजपा नेता माधव सेमवाल को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में सलाहकार की जिम्मेदारी दी गई है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली बीकेटीसी में यह नियुक्ति राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। इसके अलावा विशाल गुप्ता, पारस गोयल और रितु मित्र को गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) में गैर सरकारी निदेशक बनाया गया है। वहीं मनोज कलाकोटी को उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त कर सरकार ने सामाजिक प्रतिनिधित्व को भी महत्व देने का संदेश दिया है। पुराने चेहरों को सम्मान, नए समीकरणों की तैयारी धामी सरकार की ओर से दायित्व वितरण की यह प्रक्रिया अचानक नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कई नेता राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऐसे में चुनावी माहौल बनने से पहले उन्हें सक्रिय भूमिका देकर पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल को सेतु आयोग में सलाहकार बनाया गया। लंबे राजनीतिक अनुभव वाले दिनेश अग्रवाल को जिम्मेदारी देकर भाजपा ने दूसरे दलों से आए अनुभवी नेताओं को भी महत्व देने का संदेश दिया है। इसी क्रम में वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट को ग्रामीण अभियंत्रण सेवा परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। पर्वतीय क्षेत्रें में उनकी सक्रियता और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दायित्व वितरण में सरकार ने अलग-अलग वर्गों को साधने का प्रयास किया है। भाजपा नेत्री ज्योति कोटिया को गोरखा कल्याण परिषद का अध्यक्ष और अभिषेक शाही को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसे गोरखा समाज में राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व सैनिकों से जुड़े वर्ग को ध्यान में रखते हुए गंभीर सिंह धामी और शमशेर सिंह बिष्ट को पूर्व सैनिक कल्याण परिषद में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अनुराधा वालिया को माटी कला बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर महिला प्रतिनिधित्व को भी जगह दी गई है। रूद्रपुर नगर निगम के पूर्व मेयर रामपाल सिंह को बीस सू=ीय कार्यक्रम समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
अभी और बढ़ सकती है दायित्वधारियों की सूची
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दायित्व वितरण का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी विभिन्न संस्थाओं में जिम्मेदारी मिल सकती है। कुल मिलाकर धामी सरकार चुनावी साल में संगठन, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन तीनों मोर्चों पर तैयारी करती दिखाई दे रही है। दायित्वों की यह नई सूची केवल पद वितरण नहीं, बल्कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले संगठन की ताकत बढ़ाने की रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।

