- 105 दिनों में 45-84 लाख श्रद्धालुओं ने किए चारधाम दर्शन
- जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में ढाई गुना तक बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
- कैंची धाम में छह महीने में 24-34 लाख श्रद्धालु पहुंचे
- यमुनोत्री ने रचा नया इतिहास, 6-54 लाख से अधिक यात्रियों का रिकॉर्ड
- मानसखंड मंदिरमाला मिशन और बेहतर सुविधाओं से धार्मिक पर्यटन को मिली नई गति
देहरादून। उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय लिखा जा रहा है। कभी चारधाम यात्र तक सीमित रहने वाली श्रद्धालुओं की आस्था अब प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच चुकी है। राज्य सरकार की ओर से तीर्थस्थलों के सुनियोजित विकास, सड़क और परिवहन सुविधाओं के विस्तार, मंदिरों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा धार्मिक पर्यटन सर्किट को विकसित करने के प्रयासों का परिणाम अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2026 में चारधाम यात्र के साथ-साथ जागेश्वर धाम, त्रियुगीनारायण, धारी देवी, पूर्णागिरि, कैंची धाम और आदि कैलाश जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों में श्रद्धालुओं की संख्या ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इन आंकड़ों ने उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के दावे को और मजबूत आधार दिया है।
प्रदेश में चल रही चारधाम यात्र इस वर्ष लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। यात्र शुरू होने के 105 दिनों के भीतर ही 45 लाख 84 हजार 375 श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से कठिन पैदल मार्ग वाले यमुनोत्री धाम में भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
उत्तरकाशी जिले स्थित यमुनोत्री धाम ने इस वर्ष नया इतिहास रचा है। दो अगस्त तक यहां 6 लाख 54 हजार 958 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे पहले वर्ष 2025 में इसी अवधि तक 6 लाख 44 हजार 637, वर्ष 2024 में 5 लाख 15 हजार 67, वर्ष 2023 में 5 लाख 60 हजार 918, वर्ष 2022 में 6 लाख 21 हजार 504 तथा कोविड प्रभावित वर्ष 2021 में केवल 33 हजार 331 श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। इसी प्रकार बदरीनाथ धाम में यात्र के 100 दिन पूरे होने तक 15 लाख 52 हजार 21 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 12 लाख 40 हजार 408 थी।
चारधाम के अलावा कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अन्य धार्मिक स्थलों में भी श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अल्मोड़ा स्थित प्राचीन जागेश्वर धाम में जनवरी से जून 2026 के दौरान 1 लाख 74 हजार 119 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या केवल 67 हजार 875 थी। यानी एक वर्ष में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ढाई गुना के करीब पहुंच गई है।
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर, जहां मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, वहां भी श्रद्धालुओं का उत्साह अभूतपूर्व रहा। इस वर्ष जून तक 3 लाख 40 हजार 385 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 1 लाख 36 हजार 120 थी। इसी प्रकार श्रीनगर स्थित सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर में इस वर्ष 5 लाख 42 हजार 626 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 2 लाख 83 हजार 275 था। चंपावत के पूर्णागिरि धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या 14 लाख 35 हजार 290 से बढ़कर 20 लाख 91 हजार 788 तक पहुंच गई।
पिथौरागढ़ जिले का आदि कैलाश धाम भी धार्मिक पर्यटन का नया आकर्षण बनकर उभरा है। वर्ष 2022 से पहले जहां यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या दो हजार से भी कम रहती थी, वहीं वर्ष 2023 में 10 हजार 25, वर्ष 2024 में 29 हजार 352, वर्ष 2025 में 36 हजार 526 श्रद्धालु पहुंचे। इस वर्ष एक मई से यात्र शुरू होने के बाद केवल दो माह में ही 52 हजार 441 श्रद्धालु आदि कैलाश पहुंच चुके हैं। हालांकि मानसून के कारण फिलहाल यात्र स्थगित कर दी गई है, लेकिन दो माह में ही बना यह रिकॉर्ड राज्य में बढ़ती धार्मिक आस्था का प्रमाण माना जा रहा है।
नैनीताल जिले का कैंची धाम भी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। बाबा नीम करौली महाराज के इस प्रसिद्ध धाम में जनवरी से जून 2026 के बीच 24 लाख 34 हजार 507 श्रद्धालु पहुंचे। इनमें केवल जून माह में ही 8 लाख 66 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।
धार्मिक पर्यटन के साथ योग और आध्यात्मिक पर्यटन का संगम भी उत्तराखंड की लोकप्रियता बढ़ा रहा है। ऋषिकेश से सटे मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र में जनवरी से जून तक 15 लाख 97 हजार 439 पर्यटक पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 13 लाख 62 हजार 600 थी। कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी जैसे मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन में आई इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे केवल आस्था ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा किए गए बुनियादी विकास कार्य भी प्रमुख कारण हैं। चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना, मानसखंड मंदिरमाला मिशन, प्रमुख मंदिरों के सौंदर्यीकरण, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, आवास, डिजिटल सुविधाओं और परिवहन नेटवर्क में सुधार ने यात्र को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम बनाया है। यही कारण है कि अब श्रद्धालु केवल चारधाम तक सीमित नहीं रहकर प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों का भी रुख कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और विकास के साथ-साथ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन में लगातार हो रही वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होटल, होम-स्टे, टैक्सी, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, प्रसाद, भोजनालय और छोटे व्यापारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।
आस्था से अर्थव्यवस्था तक—
उत्तराखंड में बढ़ती तीर्थयात्र केवल धार्मिक आस्था का विस्तार नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा अवसर बन रही है। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और स्वरोजगार से जुड़े हजारों लोगों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। धार्मिक पर्यटन अब राज्य के विकास का मजबूत आर्थिक इंजन बनता जा रहा है।

