फॉर्म-7 के जरिये वोट काटने के आरोपों से गरमाई सियासत, कांग्रेस ने लगाया ‘टारगेटेड’ नाम विलोपन का आरोप
देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान ने प्रदेश के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 19-04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस का गंभीर आरोप है कि इस प्रक्रिया में सत्ताधारी दल के दबाव में फॉर्म-7 का दुरुपयोग करके चुन-चुनकर उसके समर्थकों और कैडर के वोट काटने का सुनियोजित खेल खेला जा रहा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे महज एक संवैधानिक और प्रशासनिक श्रूटीन प्रक्रियाश् करार दिया है। एसआईआर के पहले चरण में एएसडीडी (एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ, डुप्लीकेट) श्रेणी के तहत प्रदेश भर से 8 लाख 26 हजार 977 मतदाताओं के नाम पहले ही सूची से हटाए जा चुके हैं। इसके बाद 14 जुलाई को जारी अनंतिम ड्राफ्ट रोल के अनुसार राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 71,33,785 रह गई थी। हालांकि, दूसरे चरण में 19 लाख से अधिक मतदाताओं के विवरण में विसंगतियां (एनॉमोली) पाए जाने और मैपिंग न हो पाने के कारण आयोग को नोटिस जारी करने पड़े। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं पर संशय और फार्म-7 के जरिए नाम काटने के आवेदनों की बाढ़ ने 2027 के भावी विधानसभा चुनाव परिणामों के समीकरणों को लेकर राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। विपक्ष के हमलों और राजनीतिक खींचतान के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ- बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि दावे व आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध है। आयोग ने व्यवस्था दी है कि एक मतदाता अधिकतम 5 मामलों में ही आपत्तियां दर्ज करा सकता है। यदि किसी क्षेत्र से इससे अधिक मामले आते हैं, तो ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) स्वयं अपने स्तर पर गहन जांच करेंगे। इसी प्रकार, राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स को प्रतिदिन अधिकतम 10 और पूरी पुनरीक्षण अवधि के दौरान 30 फॉर्म ही जमा करने की अनुमति है। इससे अधिक फॉर्म जमा होने पर स्वतः ही प्रशासनिक जांच बैठ जाएगी। निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बीएलओ को सामान्य विसंगति वाले नोटिसों का मौके पर ही दस्तावेज लेकर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को परेशान न होना पड़े। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आयोग केवल प्रमाणिकता संबंधी दस्तावेज मांग रहा है। पार्टी का कहना है कि प्रमाणिक दस्तावेज देने वाले किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं कटेगा। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी हार की बौखलाहट में सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय जनता के बीच सिर्फ भ्रम और अफवाहें फैलाने की नकारात्मक राजनीति पर उतर आई है।
कमिश्नर और विधायक को भी मिला नोटिस
एसआईआर प्रक्रिया की जटिलता और व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नैनीताल सीट पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और स्थानीय भाजपा विधायक सरिता आर्या तक को आयोग का नोटिस प्राप्त हुआ है। उधर, खटीमा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने एसडीएम को शिकायती पत्र सौंपकर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 दािखल किए जाने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कापड़ी ने आरोप लगाया कि 3 अगस्त को ऑनलाइन प्रकाशित फॉर्म-10 के अवलोकन से साफ हुआ है कि किसी अदृश्य संगठन द्वारा पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जांच में फॉर्म-7 के तहत दािखल आपत्तियां फर्जी पाई गईं, तो पार्टी जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई कराने के साथ-साथ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।

