2027 की चुनावी बिसात पर तराई के सामाजिक समीकरण अहम
पंजाबी गौरव सम्मेलन के बहाने सीधा संवाद, नितिन नबीन ने सिख विरासत और योगदान को रखा भाषण के केंद्र में
रुद्रपुर। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच रुद्रपुर में आयोजित पंजाबी गौरव सम्मेलन को केवल सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जा रहा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने जिस तरह अपने भाषण का बड़ा हिस्सा पंजाबी-सिख समाज के संघर्ष, तराई के विकास में उसके योगदान और सिख आस्था से जुड़े केंद्र सरकार के फैसलों पर केंद्रित रखा, उसे तराई के प्रभावशाली पंजाबी-सिख समाज से राजनीतिक संवाद मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
तराई का चुनावी गणित भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने के बावजूद ऊधमसिंह नगर में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। जिले की नौ सीटों में कांग्रेस ने पांच और भाजपा ने चार सीटें जीती थीं। खटीमा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार ने भी तराई के सियासी समीकरणों की अहमियत बढ़ा दी थी। ऐसे में 2027 से काफी पहले इस क्षेत्र में संगठन और सामाजिक संपर्क बढ़ाना भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
पंजाबी गौरव सम्मेलन में नितिन नबीन ने विभाजन की पीड़ा से अपनी बात जोड़ते हुए कहा कि अपना सब कुछ छोड़कर तराई पहुंचे पंजाबी-सिख परिवारों ने मेहनत और पुरुषार्थ से खेत आबाद किए, कारोबार खड़े किए और इस क्षेत्र को समृद्ध बनाया। आज तराई उत्तराखंड के अन्न भंडार के रूप में पहचानी जाती है तो इसमें इस समाज का बड़ा योगदान है। इस संदेश के जरिए उन्होंने सीधे उस इतिहास और भावनात्मक जुड़ाव को छूने की कोशिश की, जो तराई के पंजाबी-सिख समाज की पहचान से जुड़ा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के भाषण में मुद्दों का चयन भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। नानकमत्ता साहिब और हेमकुंड साहिब से लेकर करतारपुर कॉरिडोर, वीर बाल दिवस, 1984 के सिख विरोधी दंगे और अफगानिस्तान से गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को भारत लाने तक कई ऐसे विषय उन्होंने उठाए जो सीधे सिख समाज की आस्था और भावनाओं से जुड़े हैं। इसके साथ उन्होंने हेमकुंड साहिब रोपवे को धार्मिक आस्था और विकास से जोड़कर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं का संदेश दिया।
इस पूरे समीकरण में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। तीन कृषि कानूनों के िखलाफ चले आंदोलन में ऊधमसिंह नगर के किसानों, विशेषकर पंजाबी-सिख समाज की सक्रिय भागीदारी रही थी। आंदोलन का असर तराई की राजनीति में भी महसूस किया गया था। ऐसे में भाजपा के लिए इस वर्ग के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नितिन नबीन ने पंजाब और युवाओं में नशे की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पंजाबी और सिख समाज से नशामुक्ति अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की। इससे भाषण केवल अतीत और धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज से जुड़े मौजूदा सामाजिक सवाल को भी छुआ गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी और राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा उनकी कार्यशैली की सराहना के भी राजनीतिक मायने हैं। धामी की राजनीतिक जड़ें खटीमा से जुड़ी हैं और 2022 की हार के बाद यह क्षेत्र भाजपा के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में पंजाबी गौरव सम्मेलन के मंच से संगठन, सरकार और समाज के बीच एक साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास स्पष्ट नजर आया।
कुल मिलाकर सम्मेलन ने यह संकेत जरूर दिया कि 2027 की तैयारी में भाजपा तराई के सामाजिक समीकरणों को लेकर अभी से सक्रिय है। 2022 में जिले के परिणाम और किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि को देखते हुए पंजाबी-सिख समाज से बढ़ता संवाद आने वाले चुनावी दौर में भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
2022 का नतीजा क्यों बढ़ाता है तराई की अहमियत
उत्तराखंड में 2022 में भाजपा ने 70 में 47 सीटें जीतकर सरकार बनाई, लेकिन ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस भाजपा से आगे रही। जिले की नौ में पांच सीटें कांग्रेस और चार भाजपा के खाते में गई थीं। कांग्रेस ने खटीमा, नानकमत्ता, किच्छा, बाजपुर और जसपुर जीता, जबकि भाजपा को रुद्रपुर, काशीपुर, गदरपुर और सितारगंज में जीत मिली। खटीमा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार ने तराई के चुनावी समीकरण को और महत्वपूर्ण बना दिया था। 2027 से पहले हारी सीटों पर भाजपा का माइक्रो-मैनेजमेंट इसी पिछले परिणाम की गंभीरता को दर्शाता है।

