सिख पंजाबी समाज ने पुरुषार्थ से तराई को बनाया समृद्धः नितिन
विभाजन की पीड़ा से तराई की समृद्धि तक, सिख-पंजाबी समाज ने लिखी पुरुषार्थ की गाथारू नितिन नबीन
रुद्रपुर। विभाजन की पीड़ा, विस्थापन का संघर्ष और उसके बाद अपने पुरुषार्थ से उत्तराखंड की तराई को समृद्ध बनाने में पंजाबी-सिख समाज के योगदान को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राष्ट्र निर्माण की प्रेरक गाथा बताया। रुद्रपुर के आर्क होटल में आयोजित पंजाबी गौरव सम्मेलन में उन्होंने सिख समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से लेकर देश की आजादी, सरहदों की सुरक्षा, कृषि, व्यापार और सामाजिक सेवा तक के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इस समाज के त्याग और परिश्रम को देश कभी भुला नहीं सकता।
सम्मेलन में तराई के विभिन्न क्षेत्रें से पहुंचे पंजाबी और सिख समाज के लोगों को संबोधित करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि 1947 का विभाजन इस समाज के लिए ऐसी त्रसदी लेकर आया, जिसमें हजारों परिवारों को अपनी जन्मभूमि, घर-बार और संपत्ति तक छोड़नी पड़ी। विपरीत परिस्थितियों में बड़ी संख्या में परिवार तराई क्षेत्र में आकर बसे। उनके सामने नए सिरे से जीवन खड़ा करने की चुनौती थी, लेकिन उन्होंने निराशा के बजाय मेहनत और पुरुषार्थ को अपना आधार बनाया। खेतों को आबाद किया, कारोबार स्थापित किए और धीरे-धीरे इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि आज ऊधमसिंह नगर और पूरी तराई जिस कृषि समृद्धि के लिए पहचानी जाती है, उसके पीछे पंजाबी और सिख किसानों का बड़ा योगदान है। हरित क्रांति के दौर में भी यहां के किसानों ने अपनी मेहनत और आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज तराई उत्तराखंड के अन्न भंडार के रूप में स्थापित है तो इस उपलब्धि की नींव में उन परिवारों का संघर्ष और परिश्रम भी शामिल है, जो विभाजन के बाद यहां आकर बसे थे।
नितिन नबीन ने उत्तराखंड की सिख धार्मिक विरासत का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने नानकमत्ता साहिब की पावन धरती, गुरु परंपरा और यहां मौजूद ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए कहा कि हेमकुंड साहिब, नानकमत्ता साहिब और रीठा साहिब जैसे धार्मिक स्थल देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान को और समृद्ध करते हैं। पटना साहिब से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा से जुड़े उत्तराखंड के इन पवित्र स्थलों पर आना उनके लिए विशेष अनुभूति है।
उन्होंने काशीपुर, बाजपुर, सितारगंज, खटीमा, गदरपुर और जसपुर सहित पूरी तराई में बसे पंजाबी-सिख समाज का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समाज ने कृषि तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा। उद्योग, व्यापार, शिक्षा, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रें में भी अपनी अलग पहचान बनाई और उत्तराखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना को मजबूत किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सिख समाज के बलिदान और सेवा भाव को भी सम्मेलन का प्रमुख विषय बनाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश की सीमाओं की रक्षा तक सिख वीरों की कुर्बानियों का इतिहास गौरव से भरा है। सेवा और भाईचारे की परंपरा इस समाज की विशिष्ट पहचान रही है। गुरुद्वारों में लंगर से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और संकट के समय मानव सेवा तक सिख समाज ने बार-बार यह साबित किया है कि उसके लिए मानवता और राष्ट्र सर्वाेपरि हैं।
सिख समाज की ऐतिहासिक पीड़ाओं का जिक्र करते हुए नितिन नबीन ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि निर्दाेष सिख परिवारों के साथ उस दौर में जो हुआ, उसका दर्द आज भी समाप्त नहीं हुआ है। लंबे समय तक पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा करते रहे। उन्होंने केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान वर्ष 2015 में एसआईटी के गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि 1984 की त्रसदी को न देश भुला सकता है और न भाजपा उस अन्याय को भुलाएगी।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिख आस्था से जुड़े फैसलों का जिक्र भी प्रमुखता से हुआ। नितिन नबीन ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर को वर्षों पुरानी धार्मिक आकांक्षा की पूर्ति बताते हुए कहा कि लंबे समय तक भारतीय श्रद्धालु सीमा से दूरबीन के जरिए करतारपुर साहिब के दर्शन करते थे। कॉरिडोर खुलने से श्रद्धालुओं को उस पवित्र धरती तक पहुंचने का अवसर मिला।
उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में राष्ट्रीय पहचान देने और अफगानिस्तान के संकट के दौरान सिख परिवारों तथा श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को सुरक्षित भारत लाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में उत्पीड़न झेलने वाले हिंदू-सिख समुदाय के प्रति भारत का दृष्टिकोण केवल शरण देने का नहीं, बल्कि उन्हें अपनी मिट्टðी की संतान मानकर सम्मान देने का है।
उत्तराखंड में धार्मिक कनेक्टिविटी को लेकर उन्होंने हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन यात्रा के कारण अभी बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालु हेमकुंड साहिब जाने की इच्छा पूरी नहीं कर पाते। रोपवे परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा सुगम होगी और श्रद्धालुओं के लिए यह बड़ी सुविधा बनेगी।
नितिन नबीन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास हो रहा है। विकास के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी प्रदेश की पहचान को मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंजाबी और सिख समाज को उत्तराखंड की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी बताते हुए कहा कि तराई की कृषि, उद्योग, व्यापार और सामाजिक जीवन में इस समाज की अमिट छाप है। विस्थापन की पीड़ा के बाद अपनी मेहनत से नई पहचान खड़ी करने वाले परिवारों ने उत्तराखंड की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ताकत उसकी सामाजिक एकता, भाईचारा और सभी समुदायों की सहभागिता है।
सम्मेलन का शुभारंभ अमर शहीद सरदार ऊधम सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित करने, दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरविंदर सिंह विर्क ने की। आयोजन की व्यवस्थाओं में गुरविंदर सिंह चंडोक और रोशन अरोड़ा की प्रमुख भूमिका रही। सम्मेलन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्टð, सांसद अजय भट्टð, प्रदेश पदाधिकारी, मंत्री, विधायक, महापौर विकास शर्मा सहित तराई क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और पंजाबी-सिख समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

