केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से गांवों के बुनियादी ढांचे में आएगा क्रांतिकारी बदलाव
उत्तराखण्ड सत्य,देहरादून
उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में विकास की गति को एक नई ऊर्जा मिलने जा रही है। देवभूमि की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर वित्तीय संसाधनों के द्वार खोल दिए हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रलय ने 15वें वित्त आयोग के तत्वावधान में उत्तराखंड की पंचायतों के लिए भारी-भरकम श्टाइड ग्रांटश् की सिफारिश की है, जिससे राज्य की हजारों ग्राम पंचायतों में स्वच्छता और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का कायाकल्प होना तय है। केंद्र सरकार की इस पहल का सीधा लाभ प्रदेश की उन सजग पंचायतों को मिलेगा जिन्होंने डिजिटल पारदर्शिता और सुशासन के मानकों को पूरा किया है। इस महत्वपूर्ण विकास क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने भी तत्परता दिखाते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति दी है। पंचायती राज निदेशालय ने 15वें वित्त आयोग के तहत श्अनटाइड ग्रांटश् के रूप में 93 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी कर दी है। यह फंड पंचायतों के लिए एक स्वायत्त शक्ति की तरह है, जिसका उपयोग वे अपनी भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में कर सकेंगे। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में जाएगा, जबकि क्षेत्र और जिला पंचायतों को भी उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार उचित हिस्सेदारी प्रदान की गई है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बजट का वितरण क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। अल्मोड़ा, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल जैसे जिलों को उनके विशाल ग्रामीण क्षेत्रें के अनुरूप महत्वपूर्ण आवंटन प्राप्त हुआ है, वहीं पिथौरागढ़ और देहरादून जैसे जनपदों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए गए हैं। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि बजट आवंटन की यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था यानी प्थ्डै पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। जिला पंचायत राज अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस धनराशि को बिना किसी विलंब के निचले स्तर तक पहुँचाया जाए ताकि धरातल पर काम शुरू हो सके। केंद्र द्वारा अनुशंसित श्टाइड ग्रांटश् के पीछे एक व्यापक विजन काम कर रहा है। जल शक्ति मंत्रलय ने उन पंचायतों को विशेष वरीयता दी है जिन्होंने श्ई-ग्राम स्वराजश् पोर्टल पर अपनी कार्ययोजनाएं अपलोड करने और वित्तीय ऑडिट जैसी अनिवार्यताओं को समय पर पूरा किया है। इस विशेष फंड का मुख्य केंद्र बिंदु पेयजल आपूर्ति को निरंतर बनाए रखना और गांवों को कचरा मुक्त कर स्वच्छता के नए मानक स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा जारी अनटाइड फंड से सीसी मार्ग निर्माण, स्ट्रीट लाइटों की स्थापना और सामुदायिक केंद्रों के जीर्णाेद्धार जैसे कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो सकेंगे। निश्चित रूप से, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी यह धनराशि केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने की एक ठोस प्रतिबद्धता है। प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेही तय करने के लिए उच्च अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी खजाने का पैसा अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की सुविधा के रूप में परिवर्तित हो। आने वाले हफ्तों में जब यह बजट जमीनी परियोजनाओं में बदलेगा, तब उत्तराखंड की ग्रामीण व्यवस्था आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की एक नई इबारत लिखती नजर आएगी।

