युवा नेतृत्व और विकास के भरोसे 2027 के चुनावी रण में कूदेगी भाजपा,धामी की कार्यशैली और फैसलों पर हाईकमान को भरोसा
उत्तराखण्ड सत्य,देहरादून
उत्तराखंड की राजनीति में नेतृत्व को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। भाजपा के राष्ट्रीय स्तर से आए इस भरोसे ने न केवल धामी की कार्यशैली को प्रमाणित किया है, बल्कि यह भी संकेत दे दिया है कि पार्टी अब ‘युवा नेतृत्व और कड़े फैसलों’ की रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी का अब तक का कार्य काल केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने अपनी कार्यशैली से यह सिद्ध किया है कि जटिल भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य में विकास और संस्कृति का समन्वय कैसे किया जाता है। पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल का सबसे सशक्त पक्ष उनका त्वरित निर्णय लेने का कौशल रहा है। समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाना हो या देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून बनाना, धामी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे लीक से हटकर चलने वाले मुख्यमंत्री हैं। उनके कार्यकाल में केदारखंड के साथ- साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन के माध्यम से कुमाऊं मंडल में पर्यटन और धार्मिक चेतना को जो विस्तार मिला है, उसने राज्य की आर्थिकी को नई दिशा दी है। इसके अतिरिक्त, भ्रष्टाचार के िखलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए उन्होंने युवाओं में व्यवस्था के प्रति विश्वास जगाया है। बुनियादी ढांचे के विकास में ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसे प्रोजेक्ट्स में केंद्र के साथ समन्वय बिठाकर उन्होंने राज्य को कनेक्टिविटी के नए युग में प्रवेश कराया है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो धामी को दोबारा चेहरा बनाने से भाजपा को कई स्तरों पर लाभ मिलना तय है। सबसे बड़ा लाभ ‘स्थिरता’ का संदेश देना है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ मुख्यमंत्री बदलने का एक पुराना इतिहास रहा है, वहां धामी पर निरंतर भरोसा जताना संगठन की एकजुटता को दर्शाता है। इससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति समाप्त होती है और वे एक ही नेतृत्व के झंडे तले चुनावी मोड में आ सकते हैं। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू धामी की ‘युवा और ऊर्जावान’ छवि है, जो प्रदेश के बड़े युवा मतदाता वर्ग को सीधे तौर पर जोड़ती है। साथ ही, उनकी सौम्य लेकिन निर्णय में कठोर रहने वाली छवि विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है। पार्टी को विश्वास है कि मोदी के मार्गदर्शन और धामी के क्रियान्वयन की यह ‘डबल इंजन’ जोड़ी आगामी चुनावों में सत्ता विरोधी लहर को मात देने में सक्षम होगी।
सुरक्षा और संस्कृति का पहरा-धामी मॉडल की ताकत
उत्तराखंड की सुरक्षा और उसकी मूल संस्कृति के संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो कड़ा रुख अपनाया है, वह उनकी राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस बात को रेखांकित किया है कि उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान और उसकी सीमाओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। धामी सरकार द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान और ‘लैंड जिहाद’ जैसे विषयों पर की गई कार्रवाई ने प्रदेश के भीतर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को प्रबल किया है। यह केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राजनीतिक संदेश है कि देवभूमि की डेमोग्राफी और इसके पारंपरिक स्वरूप को सहेजने के लिए सरकार किसी भी हद तक जा सकती है। इसी सुरक्षात्मक और राष्ट्रवादी सोच ने धामी को दिल्ली के गलियारों में ‘भरोसेमंद और दूरदर्शी’ चेहरे के रूप में स्थापित किया है, जो आने वाले समय में भाजपा के चुनावी एजेंडे की मुख्य धुरी होगा।

