15 मई तक यात्रा मार्गों से बर्फ हटाने और नेटवर्क कनेक्टिविटी दुरुस्त करने के निर्देश
जम्मू। श्री अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। आगामी तीन जुलाई से शुरू होने वाली 57 दिवसीय इस धार्मिक यात्रा के लिए आगामी 29 जून को प्रथम पूजा का आयोजन किया जाएगा। तैयारियों की इसी कड़ी में मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान तमाम संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। राजधानी श्रीनगर में आगामी 10 जून से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, जो यात्रा की निगरानी और प्रबंधन का मुख्य केंद्र होगा। सीमा सड़क संगठन को सख्त हिदायत दी गई है कि वे 15 मई तक यात्रा मार्गों से बर्फ हटाने का कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लें।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन इस बार बाढ़ व आपदा संभावित क्षेत्रों की विशेष पहचान कर रहा है, ताकि आपदा प्रबंधन विभाग समय रहते श्रद्धालुओं को सचेत कर सके। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए लोक निर्माण विभाग आधार शिविरों के पास की सड़कों और नीलग्राथ, बालटाल व पहलगाम के हेलिपैड की मरम्मत में जुट गया है। साथ ही, यात्रा मार्ग पर साइन बोर्ड, क्रैश बैरियर और शेल्टर शेड्स सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल से शुरू हुई अग्रिम पंजीकरण प्रक्रिया के पहले ही दिन 19,402 श्रद्धालुओं ने अपना उत्साह दर्ज कराया था।
श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और संचार की सुविधाओं के लिए भी व्यापक खाका तैयार किया गया है। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को 20 जून तक चंदनवाड़ी और बालटाल में 100-100 बिस्तरों वाले समर्पित अस्पताल स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, जहां पर्याप्त मेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस तैनात रहेंगी। इसके साथ ही, संचार व्यवस्था को मजबूती देने के लिए टेलीकाम कंपनियों को 15 मई की समयसीमा दी गई है। मौसम विभाग डाप्लर आधारित सटीक पूर्वानुमान जारी करेगा, जिसे यात्रियों की सुविधा के लिए बेस कैंपों पर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीनों के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। बिजली, पानी और राशन की निर्बाध आपूर्ति के लिए भी संबंधित विभागों को अग्रिम तैयारी के आदेश दिए जा चुके हैं।
स्वच्छता और सेवा का डिजिटल संकल्प
प्रशासन इस बार स्वच्छता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दे रहा है। ग्रामीण स्वच्छता विभाग और शहरी निकायों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सेवा प्रदाताओं और घोड़ों के प्रबंधन के लिए इस बार डिजिटल प्रीपेड सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भुगतान में सुगमता होगी। सभी लंगर स्थलों और कैंपों का सुरक्षा ऑडिट करने के साथ वहां अग्निशमन उपकरण लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

