बेंगलुरु/हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए “शुद्धिकरण अनुष्ठान” का मामला अब दूसरे राज्यों तक पहुंच गया है। इसी मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज की है।
यह अनुष्ठान 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की जनसभा के बाद किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई खड़गे की जाति को लेकर की गई और इसे जातिगत भेदभाव तथा छुआछूत से जोड़ते हुए आपत्ति जताई गई है।
किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज जीरो FIR में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की धारा 7(1)(c), 7(1)(d) और 7(1)(e), एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(u) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(b) लगाई गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(b) अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य की भावना को बढ़ावा देने से संबंधित है।
कांग्रेस नेता की शिकायत पर कार्रवाई
कांग्रेस की एसटी इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा ने 31 अगस्त को विधान सौधा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में खड़गे के साथ जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया गया।
पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने और कानूनी सलाह लेने के बाद 4 सितंबर को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, मामले में उत्तराखंड के नैनीताल क्षेत्र से जुड़े भाजपा नेताओं और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
शुद्धिकरण अनुष्ठान को लेकर राजनीतिक विवाद
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय भाजपा नेताओं ने खड़गे के अनुसूचित जाति से होने के कारण रामलीला मैदान को “अपवित्र” मानते हुए शुद्धिकरण पूजा की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मीडिया के सामने इस कार्रवाई को सही ठहराया था।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर भाजपा की ओर से पहले इसे एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान बताया गया था।
खड़गे ने राज्यसभा में उठाया था मामला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर घटना को लेकर FIR दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए थे।
खड़गे ने अपने पत्र में कथित “शुद्धिकरण” प्रक्रिया को संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के खिलाफ बताते हुए इसे छुआछूत से जोड़ा था। उन्होंने इसकी तुलना 1927 के महाड सत्याग्रह से भी की थी।
हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भी दर्ज की FIR
इसी विवाद के बीच हल्द्वानी पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान की घटना को जातिवादी रंग दिया।
वहीं कांग्रेस ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को कथित शुद्धिकरण मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर अब उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक तक राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बेंगलुरु में दर्ज जीरो FIR के बाद मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

