रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज के लिए अब आर-पार की तैयारी
मानक पूरे करने की अंतिम कवायद, अधूरी तैयारियों पर विधायक शिव अरोरा ने दिखाई सख्ती
रुद्रपुर। वर्षों से इंतजार कर रहे रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होने जा रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कराने की उम्मीद अभी कायम है, लेकिन इसके लिए मेडिकल कॉलेज को पहले नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों की कसौटी पर खरा उतरना होगा। पिछले प्रयास में इंफ्ास्ट्रक्चर संबंधी कमियों के कारण बात नहीं बन सकी थी और अब अंतिम प्रयास के आवेदन से पहले अधूरी तैयारियां पूरी करने के लिए समय से दौड़ शुरू हो गई है।
इसी दबाव के बीच विधायक शिव अरोरा ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर निर्माण, इंफ्ास्ट्रक्चर, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। तैयारियों की धीमी रफ्तार देखकर उन्होंने कार्यदायी संस्था और ठेकेदार प्रतिनिधि को कड़ी फटकार लगाई। विधायक ने साफ कर दिया कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में अब ढीला-ढाला रवैया नहीं चलेगा और तय समय में काम पूरा नहीं होने पर जवाबदेही तय कराई जाएगी।
सबसे अधिक नाराजगी फर्नीचर के लंबित काम को लेकर सामने आई। विधायक ने पेयजल निगम के अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक फर्नीचर लगाने का काम पूरा करने को कहा। उनका कहना था कि अब बहाने के लिए समय नहीं बचा है। अंतिम आवेदन से पहले इंफ्ास्ट्रक्चर, फर्नीचर, फैकल्टी और स्टाफ सहित प्रत्येक जरूरी मानक पूरा होना आवश्यक है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को भी रोजाना प्रगति पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। प्राचार्य डॉ. सीपी बसेरा को निर्माण से लेकर फर्नीचर, फैकल्टी और स्टाफ तक की डे-टू-डे प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि किसी स्तर पर होने वाली देरी का तत्काल पता चल सके।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक आशुतोष सियाना से फोन पर वार्ता कर आवश्यक फैकल्टी और मानव संसाधन उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया। इससे पहले वह देहरादून में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर 2026-27 सत्र से एमबीबीएस शुरू कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी कराने की मांग कर चुके हैं।
अब पूरा जोर अगले करीब दस दिनों में उन कमियों को दूर करने पर है, जो एनएमसी की मंजूरी की राह में बाधा बन सकती हैं। इसके बाद अंतिम प्रयास के तहत केंद्र सरकार के समक्ष आवेदन किया जाना है। ऐसे में निर्माण एजेंसी से लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग तक के बीच समन्वय इस प्रोजेक्ट की दिशा तय करेगा।
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज केवल ऊधम सिंह नगर ही नहीं, बल्कि कुमाऊं की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण परियोजना है। एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने पर क्षेत्र के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा का नया विकल्प मिलने के साथ भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यही कारण है कि लंबे समय से निर्माणाधीन इस प्रोजेक्ट को अब जल्द शुरू कराने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
विधायक शिव अरोरा का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा भी इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज शुरू कराने की है। उनके मुताबिक अब संबंधित विभागों और एजेंसियों के सामने लक्ष्य साफ हैकृकमियां दूर हों, मानक पूरे हों और अंतिम अवसर में मंजूरी हासिल की जाए।
निरीक्षण के दौरान प्राचार्य डॉ- चंद्र प्रकाश बसेरा, परियोजना प्रबंधक नरेंद्र नवानी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुमन पांडे, डॉ- राजीव कुमार सिंह, डॉ- सृजन श्रीवास्तव, व्यापार मंडल कोषाध्यक्ष संदीप राव, मनोज मदान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
पहले चूके, अब गलती की गुंजाइश नहीं
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस शुरू होने की उम्मीदें पहले भी जगी थीं, लेकिन एनएमसी के मानकों के अनुरूप इंफ्ास्ट्रक्चर की कमियां मंजूरी की राह में बाधा बन गईं। अब अंतिम प्रयास से पहले यही पिछला अनुभव प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है। फर्नीचर लगाना हो, आवश्यक फैकल्टी की उपलब्धता हो या शेष इंफ्ास्ट्रक्चरकृहर कमी समय रहते पूरी करनी होगी। अगले करीब दस दिन इसलिए केवल निर्माण कार्य की समयसीमा नहीं, बल्कि 2026-27 में रुद्रपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने की उम्मीदों की निर्णायक परीक्षा बन गए हैं।

