वर्क फ्रॉम होम से ‘नो व्हीकल डे’ तक, धामी सरकार की नई गाइडलाइन बदल देगी प्रदेश की जीवनशैली?
उत्तराखण्ड सत्य,देहरादून
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर व्यापक गाइड लाइन जारी कर दी है। अब तक केवल अपील और सलाह तक सीमित रहने वाली बातें पहली बार औपचारिक सरकारी नीति का हिस्सा बनी हैं। सरकार ने इस पहल को केवल ईंधन बचत तक सीमित न रखते हुए आर्थिक अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही ईंधन बचत को लेकर जनता से अपील कर चुके हैं और अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम करने का संदेश भी दे चुके हैं। अब शासन स्तर पर जारी दिशा-निर्देशों में सरकारी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्ेंसिंग के जरिए आयोजित करने, वर्क फ्ॉम होम को बढ़ावा देने और सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे वाहनों की आवाजाही कम होगी और पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी। नई गाइडलाइन में वीआईपी काफिलों को सीमित करने, सरकारी और निजी भवनों में एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखने और अनावश्यक सजावटी रोशनी कम करने जैसे कदम भी शामिल हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और कार पूलिंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हफ्ते में एक दिन फ्नो व्हीकल डेय् की संभावना पर भी सरकार काम कर रही है। सरकार ने केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि और सामाजिक व्यवहार को भी इस नीति से जोड़ा है। प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पाद, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और खाद्य तेल की खपत कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में पीएनजी को प्राथमिकता देने तथा रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। दरअसल, यह पूरी कवायद इस बात का संकेत है कि सरकार आने वाले समय की चुनौतियों को केवल तात्कालिक संकट नहीं मान रही, बल्कि ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के बड़े मुद्दे के रूप में देख रही है। हालांकि इन दिशा-निर्देशों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी तंत्र और आम जनता इन्हें व्यवहार में कितनी गंभीरता से अपनाते हैं। यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है तो उत्तराखंड में ऊर्जा बचत केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि नई जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है।

