जनसभा के बाद अब भी जारी है चर्चाओं का दौर, ब्रह्मकमल टोपी और पहाड़ी बोली ने जीता जनता का भरोसा
उत्तराखण्ड सत्य,देहरादून
बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने न केवल विकास की नई इबारत लिखी, बल्कि देवभूमि की राजनीति में रिश्तों की एक ऐसी चमक छोड़ी है जिसकी गूंज हफ्ता बीतने के बाद भी सुनाई दे रही है। इस कार्यक्रम के पांच दिन बाद भी सियासी गलियारों और आम जनमानस में सबसे ज्यादा चर्चा उस ‘अपनत्व’ की हो रही है, जिसे प्रधानमंत्री ने अपनी वेशभूषा और भाषा के जरिए प्रदर्शित किया। मंच पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ उनकी गजब की केमिस्ट्री ने विपक्षी खेमों में हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री को ‘युवा और कर्मठ’ कहना महज औपचारिक संबोधन नहीं था, बल्कि यह राज्य के नेतृत्व पर केंद्र के अटूट विश्वास का सार्वजनिक प्रमाण था। प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से यह लगाव नया नहीं है, लेकिन इस बार का अंदाज कुछ ज्यादा ही ‘लोकल’ रहा। सिर पर ब्रह्मकमल टोपी पहनकर और कुमाऊंनी- गढ़वाली के शब्दों से अपने संबोधन की शुरुआत कर उन्होंने यह संदेश दिया कि वह दिल्ली में रहकर भी उत्तराखंड की आत्मा से जुड़े हैं। चाहे मां डाटकाली के आशीर्वाद का जिक्र हो या फिर ‘वेड इन उत्तराखंड’ और ‘आदि कैलाश’ जैसे प्रोजेक्ट्स की ब्रांडिंग, मोदी ने एक बार फिर खुद को उत्तराखंड का सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर साबित किया। 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में जो जनसैलाब उमड़ा था, वह राज्य की राजनीति के मिजाज को भांपने के लिए काफी था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे ने टीम धामी को नई ऊर्जा से भर दिया है। मंच पर जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और कैबिनेट मंत्री एक साथ एकजुट दिखे, उसने भाजपा की आंतरिक मजबूती का संदेश भी साफ कर दिया। चुनावी बिसात पर मोदी ने किसी पर सीधा हमला किए बिना केवल अपने प्रेम और विकास कार्यों के दम पर जनता की श्हृदय रेखाश् को छूने का काम किया है। मुख्यमंत्री धामी ने भी इसे अपना सौभाग्य माना कि उन्हें प्रधानमंत्री का निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है। यह दौरा केवल पत्थर लगाने या फीता काटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उत्तराखंड के स्वाभिमान और संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दी है।
रिश्तों की प्रगाढ़ता और विकास का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच की बॉन्डिंग इस दौरे का सबसे चर्चित हिस्सा रही। मंच पर जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी संबोधन दे रहे थे, तब मोदी और धामी के बीच चली लंबी और गंभीर मंत्रणा ने यह साफ कर दिया कि राज्य की भविष्य की योजनाओं को लेकर दोनों नेताओं के बीच जबरदस्त तालमेल है। मुख्यमंत्री की बातों को प्रधानमंत्री द्वारा इतनी तन्मयता से सुनना उनकी कार्यशैली के प्रति सम्मान को दर्शाता है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने जिस तरह से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और पर्यटन स्थलों को ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के जरिए देश-दुनिया में स्थापित किया है, उसका असर अब धरातल पर दिखने लगा है। पिछले कुछ वर्षों में पीएम के 23 दौरों और धामी सरकार के कार्यकाल में उनके 14 बार आगमन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र के लिए उत्तराखंड महज एक राज्य नहीं, बल्कि एक आस्था का केंद्र और प्राथमिकताओं की सूची में सबसे ऊपर है।

