देहरादून। भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच देहरादून में 14वीं संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। 20 और 21 अगस्त को होने वाली इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारी सीमा प्रबंधन, सीमा से जुड़े विवादों और द्विपक्षीय व्यापार समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
बैठक के पहले दौर में भारत के गृह मंत्रालय, आईटीबीपी, एसएसबी और सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी शामिल हुए हैं। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बैठक के चार दौर प्रस्तावित हैं।
सीमा विवाद और पुराने नक्शों पर होगी चर्चा
बैठक में सीमा निर्धारण से जुड़े पुराने अभिलेखों और नक्शों की समीक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा है। अधिकारियों द्वारा ब्रिटिश काल के सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शों और वर्तमान जमीनी स्थिति का मिलान किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य सीमा से जुड़े विवादित क्षेत्रों को लेकर स्थिति को और स्पष्ट करना है।
ड्रोन सर्वे और आधुनिक तकनीक पर भी मंथन
14 अगस्त 2026 को लखनऊ में हुए भारत-नेपाल समन्वय सम्मेलन में दोनों देशों के सर्वे विभागों ने सीमा क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर सहमति जताई थी। इसमें ड्रोन से ली गई हवाई तस्वीरों और जमीनी स्तर से जुटाए गए आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण शामिल है।
देहरादून में चल रही बैठक में इस तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
1,751 किलोमीटर लंबी है भारत-नेपाल सीमा
भारत और नेपाल के बीच करीब 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधम सिंह नगर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिले नेपाल सीमा से जुड़े हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय से लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां होती रही हैं।
दोनों देशों के अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि सीमा विवादों के समाधान की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय लोगों की आवाजाही और व्यापार पर प्रतिकूल असर न पड़े।
दो दिन चलेगी बैठक
दोनों देशों के अधिकारी बुधवार रात देहरादून के मसूरी रोड स्थित होटल पहुंचे थे, जहां रात्रिभोज के दौरान भी अनौपचारिक मुलाकात हुई। अब 20 और 21 अगस्त को होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में सीमा प्रबंधन, व्यापार और तकनीकी सर्वे समेत कई अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जा रहा है।
USTV Rudrapur: देहरादून में हो रही भारत-नेपाल की यह बैठक उत्तराखंड से जुड़े सीमावर्ती जिलों और दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार एवं आवागमन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
