एनएमसी की आपत्तियां दूर करने की चुनौती, 27 जुलाई से पहले मानकों की पूर्ति पर टिकी कॉलेज की मंजूरी
उत्तराखण्ड सत्य,रूद्रपुर
लंबे समय से बहुप्रतीक्षित रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। भवन निर्माण लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से इंगित की गई कमियों के कारण कॉलेज को फिलहाल अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अब प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती 27 जुलाई से पहले सभी मानकों की पूर्ति कर दोबारा आवेदन प्रस्तुत करने की है। यदि यह प्रयास सफल रहा तो वर्ष 2026 से मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है। इसी कड़ी में विधायक शिव अरोरा ने मंगलवार को जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज प्रशासन तथा कार्यदायी संस्था पेयजल निगम के अधिकारियों के साथ मेडिकल कॉलेज परिसर का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को एनएमसी द्वारा निर्धारित सभी मानकों के अनुरूप कमियों को तय समय सीमा से पहले दूर करने के निर्देश दिए। हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की निरीक्षण टीम ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था। निरीक्षण के दौरान फैकल्टी, आवश्यक संसाधनों और कुछ निर्माण कार्यों में कमियां सामने आने पर आयोग ने तत्काल स्वीकृति देने के बजाय सुधार का अवसर दिया। आयोग ने 27 जुलाई तक सभी कमियां दूर कर पुनः आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। यही समय सीमा अब मेडिकल कॉलेज के भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है। निरीक्षण के दौरान विधायक शिव अरोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन और निरंतर निगरानी के कारण मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेजी से अंतिम चरण में पहुंचा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज को समय पर शुरू कराने के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री डॉ- सुबोध उनियाल को पत्र भेजकर पूरी स्थिति से अवगत कराया गया है। स्वास्थ्य मंत्री से दूरभाष पर वार्ता कर एनएमसी की सभी आपत्तियों को तत्काल दूर कराने का अनुरोध भी किया गया है। विधायक ने बताया कि स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने भी आवश्यक फैकल्टी, उपकरण और अन्य संसाधनों की उपलब्धता शीघ्र सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है, ताकि समय रहते दोबारा आवेदन किया जा सके। रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज केवल एमबीबीएस की पढ़ाई तक सीमित परियोजना नहीं है, बल्कि यह पूरे कुमाऊं क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण संस्थान बनने जा रहा है। इसके शुरू होने से स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, मरीजों को बड़े शहरों की ओर कम जाना पड़ेगा और चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। निर्माण एजेंसी और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने निर्धारित समय से पहले सभी कमियां दूर करने का भरोसा जताया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भवन तैयार होना पर्याप्त नहीं होगा। एनएमसी के मानकों के अनुरूप योग्य फैकल्टी, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, अस्पताल की कार्यक्षमता और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता भी समान रूप से महत्वपूर्ण होगी। इसलिए आगामी कुछ दिन मेडिकल कॉलेज की मंजूरी और वर्ष 2026 से एमबीबीएस कक्षाएं शुरू होने की संभावनाओं के लिए बेहद अहम साबित होंगे। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ- ऊषा रावत, पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता नवीन नवानी, पार्षद निमित्त शर्मा, मंडल अध्यक्ष धीरज गुप्ता, के-पी- राठी, राधेश्याम शर्मा, मयंक कक्कड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

