देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। प्रदेश के 13 जिला अस्पतालों और 22 उप-जिला अस्पतालों में एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट (ATU) स्थापित की जाएगी। इन केंद्रों पर नशे की लत से जूझ रहे मरीजों को इलाज के साथ-साथ काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें नशामुक्त जीवन की ओर वापस लाना है।
दो श्रेणियों में बांटे गए 35 सरकारी अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग ने एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट के लिए प्रदेश के 35 सरकारी अस्पतालों को ATU-A और ATU-B दो श्रेणियों में बांटा है।
ATU-A में 5 जिला अस्पताल शामिल
ATU-A श्रेणी में देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर के जिला अस्पतालों को शामिल किया गया है। इन अस्पतालों में 10-10 बेड की एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट स्थापित की जाएगी।
इन यूनिट में मनोचिकित्सक की सुविधा भी उपलब्ध होगी। नशा छोड़ने के लिए आने वाले मरीजों को शुरुआती करीब 30 दिनों तक चिकित्सा उपचार के साथ काउंसलिंग और मनोचिकित्सकीय उपचार दिया जाएगा।
ATU-B में 8 जिला और 22 उप-जिला अस्पताल
ATU-B श्रेणी में प्रदेश के 8 जिला अस्पतालों के साथ 22 उप-जिला अस्पतालों को शामिल किया गया है। इन अस्पतालों में 5-5 बेड की एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट बनाई जाएगी।
इन केंद्रों पर मनोचिकित्सक की तैनाती नहीं होगी। यहां फिजिशियन मरीज का शुरुआती उपचार करेंगे और जरूरत पड़ने पर मरीज को ATU-A श्रेणी के अस्पताल में रेफर किया जाएगा।
नशा मुक्ति केंद्रों पर भी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग की इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों को बेहतर और मानकीकृत उपचार उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में संचालित कुछ गैर-सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर पहले मारपीट और मरीजों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले सामने आते रहे हैं।
इसी को देखते हुए सरकार सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा और मनोचिकित्सकीय सुविधाओं के साथ नशे से जूझ रहे मरीजों के लिए व्यवस्थित उपचार व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही है।
सेलाकुई में पहले से संचालित है 10 बेड का केंद्र
वर्तमान में सेलाकुई में 10 बेड का नशा मुक्ति केंद्र संचालित हो रहा है। अब सरकार राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी अस्पतालों के माध्यम से नशा मुक्ति की स्वास्थ्य-केंद्रित व्यवस्था को विस्तार देने जा रही है।
नई व्यवस्था में सिर्फ मरीज को नशे से दूर करना ही लक्ष्य नहीं होगा, बल्कि काउंसलिंग, पुनर्वास और इलाज के बाद देखभाल के जरिए उसे सामान्य जीवन में वापस लाने पर भी जोर दिया जाएगा।
USTV Rudrapur
उत्तराखंड में नशे की बढ़ती समस्या के बीच सरकारी अस्पतालों में एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट की स्थापना को अहम पहल माना जा रहा है। खास तौर पर ऊधम सिंह नगर में जिला अस्पताल को ATU-A में शामिल किए जाने से जिले के नशे से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ उपचार और मनोचिकित्सकीय काउंसलिंग की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
