ड्राफ्ट सूची में 27 प्रतिशत मतदाताओं के रिकॉर्ड में मिलीं विसंगतियां, अब नोटिस, जांच और सुनवाई के बाद होगा अंतिम फैसला
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) के पहले चरण ने चुनावी व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 71 लाख 33 हजार 785 मतदाताओं में से 19 लाख 4 हजार 380 मतदाताओं के विवरण में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं। इसका अर्थ है कि प्रदेश के लगभग 27 प्रतिशत मतदाता किसी न किसी कारण से सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरेंगे। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन मतदाताओं को फर्जी नहीं माना गया है, बल्कि उनके अभिलेखों में दर्ज सूचनाओं की पुष्टि के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ड्राफ्ट सूची में सामने आए आंकड़े केवल नाम या वर्तनी की सामान्य त्रुटियों तक सीमित नहीं हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें मतदाता और उनके माता-पिता की आयु के बीच असामान्य अंतर दर्ज है। करीब एक लाख 99 हजार मतदाताओं की आयु अपने माता-पिता से 15 वर्ष से भी कम दर्ज हुई है, जबकि एक लाख से अधिक मामलों में माता-पिता और संतान के बीच आयु का अंतर 50 वर्ष से अधिक पाया गया। इसी तरह 92 हजार से अधिक ऐसे मतदाता मिले हैं जिनकी आयु और उनके दादा-दादी अथवा नाना-नानी की आयु के बीच अंतर 40 वर्ष से भी कम दर्ज है। दो लाख 39 हजार से अधिक मामलों में भाई-बहनों के बीच आयु का अंतर नौ माह से कम पाया गया है। निर्वाचन विभाग का मानना है कि ये आंकड़े सीधे तौर पर फर्जीवाड़े का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि रिकॉर्ड तैयार करने, डिजिटलीकरण और समय-समय पर अद्यतन किए जाने के दौरान हुई त्रुटियों की ओर संकेत करते हैं, जिनकी अब गहन जांच की जाएगी। मतदाता सूची के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि सबसे अधिक विसंगतियां बड़े और घनी आबादी वाले जिलों में दर्ज हुई हैं। देहरादून में लगभग 33 प्रतिशत, हरिद्वार में 31 प्रतिशत और ऊधम सिंह नगर में 29 प्रतिशत मतदाताओं के रिकॉर्ड जांच के दायरे में आए हैं। नैनीताल में यह आंकड़ा 27 प्रतिशत रहा, जबकि उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, चंपावत, पौड़ी, पिथौरागढ़ और अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में अभिलेखों में त्रुटियां दर्ज की गई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग पूरे प्रदेश में मतदाता सूची के आंकड़ों के व्यापक सत्यापन की आवश्यकता महसूस की गई है। निर्वाचन विभाग की रिपोर्ट में केवल आयु संबंधी विसंगतियां ही नहीं, बल्कि पारिवारिक विवरणों में भी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आई हैं। पांच लाख 70 हजार से अधिक मतदाताओं की प्रोजेनी मैपिंग में संबंधियों के नाम गलत पाए गए हैं। छह लाख 55 हजार से अधिक मतदाताओं के स्वयं के नाम में त्रुटियां दर्ज हुई हैं, जबकि एक लाख से अधिक मामलों में स्वयं द्वारा दर्ज रिश्तेदारों के नाम गलत पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त पांच लाख 26 हजार से अधिक मतदाता ऐसे मिले हैं जिनका पिछली विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के रिकॉर्ड से सही प्रकार से मिलान नहीं हो सका। एक लाख 77 हजार से अधिक ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें एक ही अभिभावक के साथ छह से अधिक मतदाताओं का नाम दर्ज है। इन सभी श्रेणियों को अलग-अलग आधार पर जांच के लिए चिन्हित किया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार अब संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की ओर से चिन्हित मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर शिविर लगाए जाएंगे, जबकि मैदानी क्षेत्रें में तहसील, नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि मतदाता अपने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। बीएलओ इन दस्तावेजों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे और उनके आधार पर रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा। यदि प्रस्तुत अभिलेख सही पाए जाते हैं तो मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन कर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची का यह व्यापक सत्यापन लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि लगभग 19 लाख रिकॉर्ड की जांच निर्वाचन तंत्र के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी साबित होगी। समयबद्ध तरीके से नोटिस जारी करना, लाखों लोगों के दस्तावेजों का परीक्षण करना और उसके बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार करना एक जटिल प्रक्रिया होगी। इसके बावजूद यह अभ्यास भविष्य में अधिक शुद्ध, अद्यतन और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुधार की प्रक्रिया, नाम काटने की नहीं
ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज विसंगतियों को लेकर निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम तत्काल हटाया नहीं जा रहा है। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि चिन्हित हुई है, केवल उन्हीं को नोटिस जारी किए जाएंगे और उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा। दस्तावेजों की जांच के बाद यदि जानकारी सही पाई जाती है तो रिकॉर्ड में संशोधन कर दिया जाएगा। यानी यह पूरी कवायद मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया है, न कि सीधे मताधिकार समाप्त करने की कार्रवाई।

