ईडी ने की चार किसानों की 13.89 करोड़ की संपत्ति कुर्क
उत्तराखण्ड सत्य,रूद्रपुर
उत्तराखंड के सबसे चर्चित और बहुचर्चित एनएच-74 भूमि अधिग्रहण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ;ईडीद्ध ने एक बार फिर अपनी सख्त कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। जांच एजेंसी ने इस घोटाले के मुख्य लाभार्थियों पर चौतरफा शिकंजा कसते हुए चार किसानों-‘ दिलबाग सिंह, जरनैल सिंह, बलजीत कौर और दलविंदर सिंहकृकी 13.89 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई यह कार्रवाई ऊधमसिंह नगर जनपद में स्थित उन बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों पर हुई है, जिन्हें घोटाले की काली कमाई के जरिए अर्जित किया गया था। ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई ने उन रसूखदारों की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने वर्षों पहले राजस्व अधिकारियों के साथ साठगांठ कर सरकारी खजाने में बड़ी सेंध लगाई थी और यह मान बैठे थे कि अब वे कानून की नजरों से बच चुके हैं। ईडी की विस्तृत और गहन जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इन आरोपियों ने तत्कालीन राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर एक अत्यंत सुनियोजित वित्तीय सिंडिकेट चलाया था। इन्होंने कानून की बारीकियों का फायदा उठाते हुए अपनी उपजाऊ कृषि भूमि को कागजों में रातों-रात अकृषि ;कमर्शियलद्ध घोषित करवा दिया। यह सब इसलिए किया गया ताकि नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान अधिग्रहित होने वाली भूमि का मुआवजा सामान्य दरों से कई गुना बढ़ जाए। इस सुनियोजित खेल के जरिए आरोपियों ने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवजा डकार लिया। जांच एजेंसी ने पाया कि इस अवैध राशि को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने बड़ी चालाकी से इसे अपने विभिन्न रिश्तेदारों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया और उसे निवेश के अलग-अलग रास्तों पर फैला दिया। अब ईडी की पैनी नजर उन रिश्तेदारों और सहयोगियों पर भी है, जिनके खातों का इस्तेमाल इस करोड़ों की हेराफेरी को श्सफेदश् करने के लिए किया गया था। सूत्रों के अनुसार, आरोपी किसानों में से अधिकांश वर्तमान में पंजाब और आसपास के राज्यों में बस चुके हैं, लेकिन ईडी की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध की कमाई कहीं भी सुरक्षित नहीं है। एजेंसी अब इस मामले में अन्य उन रसूखदार लाभार्थियों और सफेदपोशों की कुंडली खंगाल रही है, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे भ्रष्टाचार को न केवल खाद-पानी दिया, बल्कि मुआवजे की बंदरबांट में बड़ा हिस्सा भी हासिल किया। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही जनपद के कई अन्य बड़े भू-स्वामी और बिचौलिए भी रडार पर आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईडी कुछ और बड़ी कुर्की और सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है, जिससे इस महाघोटाले में शामिल कई बड़े चेहरों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
कैसे खेला गया ‘लैंड यूज’ का खेल?
नेशनल हाईवे-74 घोटाले की पटकथा वर्ष 2011 से 2016 के बीच ऊधमसिंह नगर जिले में लिखी गई थी। जब सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू हुआ, तो भूमि अधिग्रहण के नाम पर भ्रष्टाचार का एक विशाल तंत्र सक्रिय हो गया। इस घोटाले का सबसे बड़ा हथियार बना धारा-143। राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने पिछली तारीखों ;बैकडेटिंगद्ध में फाइलों को घुमाया और उन उपजाऊ खेतों को ‘अकृषि’ दिखा दिया, जहाँ वास्तव में फसलें लहलहा रही थीं। नियम के अनुसार, कृषि भूमि के मुकाबले अकृषि भूमि का मुआवजा दस गुना तक अधिक होता है। इसी फार्मूले का उपयोग कर करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी पैसा चंद लोगों की जेबों में पहुंचा दिया गया। वर्ष 2017 में जब कुमाऊं कमिश्नर की रिपोर्ट पर एसआईटी जांच शुरू हुई, तो कई पीसीएस अधिकारियों और रसूखदारों को सलाखों के पीछे जाना पड़ा, जिसके बाद अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इस पाप की कमाई को जब्त करने में जुटी है।

