आगामी 9 मार्च से भराड़ीसैण में जुटेगी सत्ता और सियासत
उत्तराखण्ड सत्य,देहरादून
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण ;भराड़ीसैणद्ध एक बार फिर प्रदेश की सियासत का केंद्र बनने जा रही है। आगामी 9 से 13 मार्च तक आयोजित होने वाले विधानसभा के बजट सत्र ने शासन से लेकर सदन तक हलचल तेज कर दी है। एक ओर जहां सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विकास का खाका खींचने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरने की पुख्ता घेराबंदी शुरू कर दी है। उत्तराखंड विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग ने सत्र की प्रस्तावित तिथियों का पत्र विधानसभा सचिवालय को भेज दिया है। वर्तमान में इन तिथियों पर अंतिम मुहर के लिए फाइल राजभवन भेजी गई है। राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही विधानसभा सचिव द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। भराड़ीसैण स्थित विधानसभा भवन में इस बार सत्र का आयोजन कई मायनों में खास है, क्योंकि पिछले वर्ष मेंटेनेंस कार्यों के चलते यहां सत्र नहीं हो सका था। विधानसभा अध्यक्ष )तु भूषण खंडूड़ी ने स्पष्ट किया कि पिछले साल भवन का सुदृढ़ीकरण कार्य गतिमान था, जो अब पूर्ण हो चुका है। अब भराड़ीसैण पूरी तरह से लोकतंत्र के इस महापर्व की मेजबानी के लिए तैयार है। बजट सत्र की आहट के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सत्र की अवधि बढ़ाने की पुरजोर मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि मात्र 5 दिनों के सत्र में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा संभव नहीं है। विपक्ष इस बार बिगड़ती कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, शिक्षा का गिरता स्तर, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और मनरेगा कानून की पुनः बहाली जैसे विषयों पर सरकार को निरुत्तर करने की रणनीति बना रहा है। इसके अलावा, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का भावनात्मक मुद्दा भी सदन के भीतर गूंजना तय माना जा रहा है। एक ओर जहां सियासी पारा चढ़ रहा है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बजट को जन-आकांक्षी बनाने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आगामी बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने इसके लिए व्यापक स्तर पर ‘प्री-बजट कंसल्टेशन’ ;बजट पूर्व संवादद्ध किया है। सीएम धामी के अनुसार, व्यापारियों, किसानों, उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों को बजट में प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा समावेशी बजट पेश करना है जो उत्तराखंड के विकास को नई ऊंचाई दे सके।बहरहल यह सत्र धामी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भराड़ीसैण की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होना आवश्यक है। जनता को अपने विधायकों से उम्मीद है कि उनके क्षेत्र की समस्याओं और प्रदेश के विकास पर लंबी और गंभीर बहस होगी, न कि सत्र केवल हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा। अब सबकी निगाहें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब गैरसैंण की वादियों में उत्तराखंड के भविष्य का बजट पेश होगा।

