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    उत्तराखंड

    आपके घर का ‘एक्स-रे’ करेगा गृह मंत्रालय

    उत्तराखंड सत्यBy उत्तराखंड सत्यFebruary 21, 2026No Comments6 Mins Read
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    उत्तराखंड में 25 अप्रैल से महाभियान का आगाज, छत से लेकर इंटरनेट और अनाज तक का हिसाब लेगी सरकार

    अजय चड्डा,रूद्रपुर
    भारत सरकार अब आपके घर के भीतर की सुख-सुविधाओं और जीवन स्तर का सबसे सटीक और बड़ा डेटाबेस तैयार करने की तैयारी में है। गृह मंत्रालय की ताजा अधिसूचना के बाद अब देश का हर नागरिक उन 33 तीखे लेकिन जरूरी सवालों का सामना करने के लिए तैयार हो जाए, जो सीधे तौर पर आपकी निजी दिनचर्या और गृहस्थी से जुड़े हैं। उत्तराखंड में इस विशाल कवायद का आगाज आगामी 25 अप्रैल से होने जा रहा है, जो 24 मई तक चलेगा। यह महज एक गिनती नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकार की भविष्य की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं का बुनियादी आधार बनने वाला एक ‘सोशियो-इकोनॉमिक एक्स-रे’ है। इस दौरान जनगणना कर्मी आपके घर पहुँचकर न केवल मकान मालिक का नाम पूछेंगे, बल्कि आपके फर्श की टाइल्स, दीवारों की मजबूती और छत की सामग्री तक का पूरा ब्यौरा दर्ज करेंगे। जनगणना निदेशालय ने इस महाभियान को लेकर अपनी कमर कस ली है और निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि पूछे जाने वाले तमाम सवाल पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे, ताकि किसी भी नागरिक की निजता का हनन न हो। इस बार की मकान गणना पारंपरिक कागजी प्रपत्रों के बजाय आधुनिक तकनीकी पहलुओं पर आधारित होगी, जिसके लिए 19 से 28 फरवरी के बीच जिलावार गहन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में मास्टर ट्रेनर्स द्वारा चार्ज अधिकारियों और तकनीकी सहायकों को ‘सीएमएमएस पोर्टल’ की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। सरकार की मंशा साफ है कि इस बार डेटा संकलन में मानवीय त्रुटि की गुंजाइश शून्य हो और तकनीक के माध्यम से हर घर की वास्तविक तस्वीर शासन के सामने आ सके। इस प्रश्नावली का दायरा इतना विस्तृत है कि इसमें आपके घर के कमरों की संख्या और विवाहित दंपतियों के विवरण के साथ-साथ आपके जीवन स्तर को परिभाषित करने वाले गैजेट्स को भी शामिल किया गया है। आपसे पूछा जाएगा कि आपके पास सूचना का साधन रेडियो है या टेलीविजन, और क्या आप डिजिटल युग की दौड़ में शामिल होकर इंटरनेट और लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, रसोई में जलने वाले ईंधन से लेकर आपके घर से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था तक का विवरण इस सूची में दर्ज होगा। पेयजल का मुख्य स्रोत, शौचालय की सुलभता और प्रकाश के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली या सोलर ऊर्जा जैसे सवाल सीधे तौर पर सरकार को यह समझने में मदद करेंगे कि बुनियादी ढांचागत विकास का लाभ आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचा है या नहीं। परिवहन के साधनों की बात करें तो आपके पास मौजूद साइकिल, स्कूटर या फिर कार और जीप की जानकारी भी इस गणना का हिस्सा होगी। यहाँ तक कि आप मुख्य रूप से किस अनाज का सेवन करते हैं, इसे भी सरकार अपनी रिकॉर्ड बुक में दर्ज करेगी। हालांकि मोबाइल नंबर केवल जनगणना संबंधी सूचनाओं के लिए ही मांगा जा रहा है, लेकिन 33 सवालों का यह पूरा सेट आपके घर की आर्थिक और सामाजिक कुंडली को पूरी तरह खोलकर रख देगा। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों से लेकर तराई के मैदानों तक एक साथ चलने वाला यह अभियान प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन जिस तरह से प्रशिक्षण और पोर्टल मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है, उससे साफ है कि इस बार मकानों की गणना का यह प्रारूप देश के नीति-निर्धारण में एक मील का पत्थर साबित होगा।भारत सरकार अब आपके घर के भीतर की सुख-सुविधाओं और जीवन स्तर का सबसे सटीक और बड़ा डेटाबेस तैयार करने की तैयारी में है। गृह मंत्रालय की ताजा अधिसूचना के बाद अब देश का हर नागरिक उन 33 तीखे लेकिन जरूरी सवालों का सामना करने के लिए तैयार हो जाए, जो सीधे तौर पर आपकी निजी दिनचर्या और गृहस्थी से जुड़े हैं। उत्तराखंड में इस विशाल कवायद का आगाज आगामी 25 अप्रैल से होने जा रहा है, जो 24 मई तक चलेगा। यह महज एक गिनती नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकार की भविष्य की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं का बुनियादी आधार बनने वाला एक श्सोशियो-इकोनॉमिक एक्स-रेश् है। इस दौरान जनगणना कर्मी आपके घर पहुँचकर न केवल मकान मालिक का नाम पूछेंगे, बल्कि आपके फर्श की टाइल्स, दीवारों की मजबूती और छत की सामग्री तक का पूरा ब्यौरा दर्ज करेंगे। जनगणना निदेशालय ने इस महाभियान को लेकर अपनी कमर कस ली है और निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि पूछे जाने वाले तमाम सवाल पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे, ताकि किसी भी नागरिक की निजता का हनन न हो। इस बार की मकान गणना पारंपरिक कागजी प्रपत्रों के बजाय आधुनिक तकनीकी पहलुओं पर आधारित होगी, जिसके लिए 19 से 28 फरवरी के बीच जिलावार गहन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में मास्टर ट्रेनर्स द्वारा चार्ज अधिकारियों और तकनीकी सहायकों को ‘सीएमएमएस पोर्टल’ की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। सरकार की मंशा साफ है कि इस बार डेटा संकलन में मानवीय त्रुटि की गुंजाइश शून्य हो और तकनीक के माध्यम से हर घर की वास्तविक तस्वीर शासन के सामने आ सके। इस प्रश्नावली का दायरा इतना विस्तृत है कि इसमें आपके घर के कमरों की संख्या और विवाहित दंपतियों के विवरण के साथ-साथ आपके जीवन स्तर को परिभाषित करने वाले गैजेट्स को भी शामिल किया गया है। आपसे पूछा जाएगा कि आपके पास सूचना का साधन रेडियो है या टेलीविजन, और क्या आप डिजिटल युग की दौड़ में शामिल होकर इंटरनेट और लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, रसोई में जलने वाले ईंधन से लेकर आपके घर से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था तक का विवरण इस सूची में दर्ज होगा। पेयजल का मुख्य स्रोत, शौचालय की सुलभता और प्रकाश के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली या सोलर ऊर्जा जैसे सवाल सीधे तौर पर सरकार को यह समझने में मदद करेंगे कि बुनियादी ढांचागत विकास का लाभ आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचा है या नहीं। परिवहन के साधनों की बात करें तो आपके पास मौजूद साइकिल, स्कूटर या फिर कार और जीप की जानकारी भी इस गणना का हिस्सा होगी। यहाँ तक कि आप मुख्य रूप से किस अनाज का सेवन करते हैं, इसे भी सरकार अपनी रिकॉर्ड बुक में दर्ज करेगी। हालांकि मोबाइल नंबर केवल जनगणना संबंधी सूचनाओं के लिए ही मांगा जा रहा है, लेकिन 33 सवालों का यह पूरा सेट आपके घर की आर्थिक और सामाजिक कुंडली को पूरी तरह खोलकर रख देगा। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों से लेकर तराई के मैदानों तक एक साथ चलने वाला यह अभियान प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन जिस तरह से प्रशिक्षण और पोर्टल मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है, उससे साफ है कि इस बार मकानों की गणना का यह प्रारूप देश के नीति-निर्धारण में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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