प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर होगी कार्रवाई
उत्तराखण्ड सत्य,रूद्रपुर
रुद्रपुर की जीवनरेखा कही जाने वाली कल्याणी नदी को प्रदूषण के दलदल से बाहर निकालने के लिए जिला प्रशासन ने अब एक निर्णायक और बेहद सख्त अभियान का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को जिला सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी के कड़े तेवर ने औद्योगिक जगत में हलचल मचा दी है। सीडीओ ने सिडकुल क्षेत्र की कंपनियों के पदाधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि औद्योगिक विकास की कीमत पर कल्याणी नदी को जहरीला बनाने की अनुमति किसी भी सूरत में नहीं दी जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सभी औद्योगिक संस्थान अपने यहां स्थापित ट्रीटमेंट प्लांटों की कार्यप्रणाली की तत्काल समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि एक भी बूंद प्रदूषित पानी बिना शोधित किए नदी में न गिरे। प्रशासन ने कंपनियों को सुधार के लिए केवल एक माह का समय दिया है, जिसके बाद जिले की तकनीकी टीमें औचक निरीक्षण कर पानी की सैंपलिंग करेंगी और मानक विहीन पाई जाने वाली इकाइयों के खिलाफ ऐसी कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी जो नजीर बनेगी। प्रशासन की यह योजना केवल सतही निर्देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बार प्रदूषण के मुख्य स्रोतों को चिन्हित करने के लिए एक वैज्ञानिक और त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र तैयार किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सिडकुल प्रबंधन को निर्देशित किया है कि वे कल्याणी नदी के बहाव क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटकर उसकी गहन जांच करें। इसमें नदी के सिडकुल क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले की स्थिति, सिडकुल से निकलने के बाद अटरिया मंदिर के पास की स्थिति और फिर शहर की सीमा समाप्त होकर उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर नदी के स्वरूप का सूक्ष्म अध्ययन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि नदी के किस विशेष खंड में और किन उद्योगों के माध्यम से सर्वाधिक प्रदूषण फैल रहा है। इसके अलावा उन कंपनियों की एक अलग ‘रेड लिस्ट’ तैयार की जा रही है जो अपने उत्पादन कार्यों में खतरनाक रसायनों का प्रयोग करती हैं। इन कंपनियों की मॉनिटरिंग के लिए क्षेत्रीय अधिकारी एसपी सिंह को नियमित अंतराल पर निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। कल्याणी नदी की सफाई को लेकर प्रशासन का रुख इस बार पहले से कहीं अधिक गंभीर नजर आ रहा है। मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ट्रीटमेंट प्लांट केवल फाइलों पर नहीं बल्कि धरातल पर क्रियाशील होने चाहिए। यदि किसी कंपनी के प्लांट केवल निरीक्षण के समय चलते पाए गए या उनमें तकनीकी खामी मिली, तो इसे जानबूझकर किया गया अपराध माना जाएगा। नदी को प्रदूषणमुक्त करना केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा सामूहिक दायित्व है, और जो संस्थान इस जिम्मेदारी से पीछे हटेंगे, उन्हें प्रशासन के कड़े कानूनी चाबुक का सामना करना पड़ेगा। नदी संरक्षण की इस बड़ी कवायद में प्रशासन का पूरा तंत्र सक्रिय हो गया है। बैठक में अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने प्रशासनिक पहलुओं पर जोर दिया, वहीं उप जिलाधिकारी एवं आरएम सिडकुल मनीष बिष्ट को कंपनियों के साथ बेहतर समन्वय और निरीक्षण की कमान सौंपी गई है। सहायक अभियंता सुनील कुमार और दिलदार अली सहित विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के एचआर प्रमुखों को भी इस अभियान में रचनात्मक सहयोग करने और अपने संस्थानों के भीतर पर्यावरण मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा गया है। प्रशासन की इस सक्रियता ने यह उम्मीद जगा दी है कि दशकों से प्रदूषण की मार झेल रही कल्याणी नदी को जल्द ही अपना पुराना और स्वच्छ स्वरूप वापस मिल सकेगा।

