सुशासन, उद्यानिकी और रोजगार के मोर्चे पर नीतियों से नतीजों तक पहुंचना सरकार के लिए चुनौती
अजय चड्डा,देहरादून
नए साल के साथ उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक मशीनरी एक बार फिर बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का संकेत दे रही है। साल 2026 को लेकर राज्य सरकार की जो तस्वीर उभर रही है, वह केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि अब जोर फ्नीतियों से परिणामय् तक पहुंचने पर है। बीते वर्षों में बनी योजनाओं, अधूरी परियोजनाओं और जमीनी हकीकत के अनुभवों के आधार पर सरकार इस साल को निर्णायक मानकर आगे बढ़ रही है।राज्य सरकार पहले ही सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दे चुकी है कि योजनाएं कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखनी चाहिए। इसी क्रम में 2026 की कार्ययोजना को सुशासन, समावेशी विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता, कृषि-उद्यानिकी सशक्तिकरण और पर्यावरण संतुलन जैसे व्यापक लक्ष्यों के इर्द-गिर्द केंद्रित किया गया है। यह संकेत है कि सरकार अब विकास को एकांगी नहीं, बल्कि बहुआयामी नजरिये से आगे बढ़ाना चाहती है। सुशासन सरकार की इस रणनीति का केंद्रीय स्तंभ है। प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-आधारित बनाने के लिए ई-गवर्नेंस को सभी विभागों में अनिवार्य रूप से लागू करने की तैयारी है। डिजिटल फाइल सिस्टम, ऑनलाइन सेवाओं और समयबद्ध डिलीवरी के जरिए आम नागरिक और सरकार के बीच की दूरी को कम करने का दावा किया जा रहा है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण और सेवाओं की तय समय-सीमा में उपलब्धता को सरकार अपनी प्राथमिकता बता रही है। सवाल यही है कि क्या यह व्यवस्था पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रें में भी उसी प्रभावशीलता से लागू हो पाएगी, जैसा शहरी इलाकों में अपेक्षित है। इंफ्ास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी 2026 को अहम साल माना जा रहा है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती देना सरकार के एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है। चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेल परियोजना, हेली सेवाओं का विस्तार और सीमावर्ती क्षेत्रें में रणनीतिक सड़कों के निर्माण पर फोकस किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि बेहतर कनेक्टिविटी केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और आपात सेवाओं की पहुंच को भी आसान बनाएगी। हालांकि, पर्यावरणीय संतुलन और निर्माण की गति के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती भी रहेगा। साल 2026 की सबसे ठोस और दूरगामी रणनीति कृषि और उद्यानिकी को आय बढ़ाने के मुख्य साधन के रूप में स्थापित करने की है। धामी सरकार ने साफ किया है कि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक सीमाओं को कमजोरी नहीं, बल्कि अवसर में बदला जाएगा। पॉली हाउस खेती, कीवी उत्पादन, हाई वैल्यू फसलों और सेब-कीवी नीति को विशेष प्राथमिकता इसी सोच का परिणाम है।पर्वतीय क्षेत्रें में पॉली हाउस आधारित खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की योजना है, ताकि किसान वर्ष भर सब्जी, फूल और उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगा सकें। इसके लिए अनुदान, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया गया है। यदि यह मॉडल सही ढंग से लागू हुआ, तो यह न केवल किसानों की आय बढ़ा सकता है, बल्कि पारंपरिक खेती पर निर्भरता को भी कम कर सकता है। इसी तरह कीवी मिशन के जरिए उत्तराखंड को देश का प्रमुख कीवी उत्पादक राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कम भूमि में अधिक आय, बेहतर बाजार मूल्य और निर्यात की संभावनाएं कीवी को किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बनाती हैं। सरकार का मानना है कि कीवी, सेब, नाशपाती, अखरोट जैसे पहाड़ी फलों की मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर खेती से आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया जा सकता है। इसका एक बड़ा उद्देश्य पलायन पर रोक लगाना और गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा करना है।पर्यटन को भी सरकार 2026 में आर्थिक इंजन के रूप में विकसित करना चाहती है। चारधाम यात्र को सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ विंटर टूरिज्म, साहसिक पर्यटन, ईको-टूरिज्म और होमस्टे योजनाओं को प्रोत्साहन देने की बात कही जा रही है। खास बात यह है कि पर्यटन से जुड़े रोजगार में स्थानीय युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि इसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचे।रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के मोर्चे पर सरकार ने सरकारी भर्तियों को पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और नकलमुक्त बनाए रखने का संकल्प दोहराया है। निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए स्टार्टअप, आईटी पार्क, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की योजना है। युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं के विस्तार को भी 2026 के एजेंडे में प्रमुखता दी गई है।साथ ही समान नागरिक संहिता (न्ब्ब्) के बेहतर क्रियान्वयन के साथ महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देने की बात कही जा रही है। स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी योजना और महिला उद्यमिता के जरिए महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यावरण के मोर्चे पर हिमालयी पारिस्थितिकी का संरक्षण, नदियों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वनों की सुरक्षा और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना सरकार की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं में शामिल है। कुल मिलाकर 2026 उत्तराखंड सरकार के लिए केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि परिणाम दिखाने का वर्ष बताया जा रहा है। उद्यानिकी, पॉली हाउस और कीवी जैसी उच्च आय वाली योजनाओं के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है। पारदर्शी भर्तियों, स्टार्टअप और स्वरोजगार के अवसरों के जरिए राज्य को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि 2026 वास्तव में उत्तराखंड के लिए फ्परिणामों का वर्षय् बन पाता है या फिर यह भी पिछले वर्षों की तरह उम्मीदों और योजनाओं के बीच उलझ कर रह जाता है।
नये साल में उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकताएं एक नजर में
साल 2026 को उत्तराखंड सरकार फ्नीतियों से परिणामय् के वर्ष के रूप में देख रही है। सुशासन के तहत ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाएं और समयबद्ध डिलीवरी पर जोर रहेगा। कृषिदृउद्यानिकी में पॉली हाउस खेती, कीवी और सेब जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों से किसानों की आय बढ़ाने की योजना है। पर्यटन को आर्थिक इंजन बनाते हुए चारधाम, विंटर और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। युवाओं के लिए पारदर्शी भर्तियां, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट तथा महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी और उद्यमिता योजनाएं प्रमुख रहेंगी। पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी संतुलन सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा।

