उत्तराखण्ड सत्य,रूद्रपुर
विधायक तिलक राज बेहड़ ने प्रेस वार्ता में कहा देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत के नेतृत्व में पाकिस्तान से आए आजादी के बाद विस्थापित लोगों को तराई के अंदर बसाया गया जमीन आवंटित की गई सन 1956 से लेकर 1961 तक के दशक में विभाजन से विस्थापित लगभग 20000 से अधिक पंजाबी सिख परिवारों को तराई में पुनर्वास कराया गया। बेहड़ ने कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए कहा पंडित राम सुमेर शुक्ला को तराई का संस्थापक कहा जाना क्षेत्र की जनता का अपमान है राम सुमेर शुक्ला ना ही कभी संस्थापक थे ना है ना कभी रहे हैं। जानबूझकर प0 रामसुमेर शुक्ला को तराई का संस्थापक बताकर जो स्थापित किया जा रहा है यह गलत है संस्थापक बताने वाले लोग, जिन्होंने जंगल काट कर खेतों की जमीन तैयार की 10-10,15-15 एकड़ के अलॉटमेंट किए गए हजारों पंजाबी सिख और अन्य धर्म व पश्चिम उत्तर प्रदेश तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश से लोग आए थे तथा बसावट में रहने वाले थारू बुक्सा समाज,पहाड़ के लोग तथा अन्य लोगों ने मिलकर तराई को आबाद किया ऐसे लोग जिन्होंने बड़ी मेहनत करके तराई को बसाया ऐसे लोगों का लगातार अपमान किया जा रहा है जो किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बेहड़ ने कहा तराई को बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका पंडित गोविंद बल्लभ पंत, मेजर एच0एस0 संधू,ए0एन0झा,के-बी-भाटिया,पंडित लक्ष्मणदत्त भट्टð,खान बहादुर सरवत यार खान आदि महापुरुषों की रही-तराई को बसाने में 31 लोगों की 1946 में तराई भाबर नाम की कमेटी बनाकर की गई जिसमें कमेटी के प्रीमियर प्रधान पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी थे । पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी द्वारा बाद में राम सुमेर शुक्ला को देखभाल को लगाया गया जिसमें और भी कई लोग विभिन्न वर्गों के शामिल थे। राम सुमेर शुक्ला का सराहनीय योगदान रहा स्वतंत्रता सेनानी थे हम उनका सम्मान करते है। बेहड़ ने कहा कि 1950 से 60 के दशक में तराई का जिन्होंने नेतृत्व किया मेजर संधू ए-एन-झा की निर्णायक भूमिका रही इनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता इनकी भूमिका के कारण तराई में पुनर्वास और कृषि विस्तार को गति मिली तब ये दो नाम प्रमुख रूप से सामने आते हैं।बेहड़ ने कहा कि 1956 में संयुक्त राज्य अमेरिका की लैंड-ग्रांट विश्वविद्यालय प्रणाली के साथ कृषि तकनीक सहयोग में शामिल पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक आधार- व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। बेहड़ ने कहा 1960 के बाद पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रारंभिक प्रशासन का नेतृत्व इन योगदानों का विवरण उत्तर प्रदेश कृषि रूपांतर रिपोर्ट 1963 तथा पंतनगर स्थापना अभिलेख में स्पष्ट देखने को मिलता है। बेहड़ ने कहा कि पंडित राम सुमेर शुक्ला स्वतंत्रता सेनानी थे, उनका विशेष योगदान रहा हम उनका सम्मान करते हैं, उनके योगदान को भूलाया नहीं जा सकता परंतु बार-बार उनको संस्थापक कहां जाना तराई की जनता का अपमान किया जाता है, जिन्होंने कड़ी मेहनत से आज कृषि के क्षेत्र में तराई का एक अपना स्थान है विस्थापित लोगों को 10-10,15-15 एकड़ जमीन मिली ऐसे लोगों भी थे जिन्होंने हजारों एकड़ जमीन बड़े-बड़े फॉर्म बनाकर दर्ज कर ली परंतु जिन्होंहे कड़ी महत् से बसाया उनका कही जिक्र नहीं होता, जिसमें पंडित गोविंद बल्लभ पंत, मेजर संधू ,ए0एन झा जिनके परिश्रम से वास्तव में तराई आवाद हुई ऐसे लोगों को दरकिनार किया जा रहा है।

