1.11 लाख करोड़ के बजट के साथ धामी कैबिनेट ने बुना खुशहाली का ताना-बाना
अजय चड्डा,रूद्रपुर
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में संपन्न हुई हालिया कैबिनेट बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय कर दी है। सरकार ने इस बार विकास के पहिए को और तेज करने के संकल्प के साथ पिछले वर्ष की तुलना में बजट में 10 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। अब उत्तराखंड का आगामी बजट 1-11 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छूने जा रहा है, जिसे सदन के पटल पर रखने की तैयारी पूरी कर ली गई है। खास बात यह है कि कैबिनेट ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बजट में किसी भी आवश्यक संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है, जो सरकार की निर्णय लेने की त्वरित कार्यशैली को दर्शाता है। राज्य सरकार का इस बार का मुख्य फोकस ‘जड़ से जुड़ाव और भविष्य की तैयारी’ पर नजर आता है। शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए मंत्रिमंडल ने स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड पुस्तकालय योजना और मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के विस्तार को मंजूरी दी है। अब उन 21 अशासकीय अनुदानित महा विद्यालयों को भी शोध प्रोत्साहन का लाभ मिलेगा जहां नियमित प्राचार्य तैनात हैं। यह निर्णय न केवल राज्य में शोध की संस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी मील का पत्थर साबित होगा। इसी तरह, पर्यावरण संरक्षण और शहरी प्रबंधन को नई ऊंचाई देने के लिए प्रदेश के सभी 11 नगर निगमों में पर्यावरण अभियंताओं के पदों का सृजन किया गया है, जो यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल विस्तार पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक समाधानों पर भी जोर दे रही है। महिला और बाल विकास के मोर्चे पर धामी सरकार ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान और बाल पालाश योजना के तहत न केवल 3 से 6 साल तक के बच्चों के लिए पोषण सामग्री का दायरा बढ़ाया गया है, बल्कि मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। अब गर्भवती महिलाओं और बच्चों को केवल अंडा, दूध या केला ही नहीं, बल्कि उनकी जरूरतों के अनुसार अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। सामाजिक न्याय की दिशा में यह कदम कुपोषण के िखलाफ उत्तराखंड की लड़ाई को और मजबूती प्रदान करेगा। इसके साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ‘मौन पालन नीति 2026’ और सेब की अत्याधुनिक नर्सरी विकास योजना को दी गई मंजूरी राज्य के बागवानों और किसानों के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खोलेगी। प्रशासनिक और न्यायिक सुधारों के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने दूरगामी फैसले लिए हैं। प्रदेश में न्याय प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए देहरादून, काशीपुर और विकासनगर में तीन नई फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय सुधारों में से एक, जीएसटी अपीलीय अधिकरण की राज्य पीठ को देहरादून में बरकरार रखते हुए हल्द्वानी में एक अतिरिक्त सर्किट बेंच की स्थापना को मंजूरी देना है। इससे कुमाऊं मंडल के व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, समान नागरिक संहिता संशोधन विधेयक और जन विश्वास विधेयक जैसे विधायी बदलावों को मंजूरी देकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य में एक पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्व बैंक के सहयोग से शुरू होने वाले जलापूर्ति और वित्तीय प्रबंधन के प्रोजेक्ट्स राज्य की बुनियादी सुविधाओं में आधुनिकता का समावेश करेंगे।
प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और नीतिगत बदलाव
कैबिनेट के फैसलों का एक बड़ा हिस्सा राज्य के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने से जुड़ा है। उत्तराखंड राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए किशोर न्याय समितियों के मानदेय में वृद्धि की गई है, जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले सदस्यों का उत्साह बढ़ेगा। इसी प्रकार, कारागार प्रशासन के लिपिकीय संवर्ग का पुनर्गठन और न्यायालयों के लिए 14 नए कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति न्याय प्रशासन को अधिक पेशेवर बनाएगी। पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन बिठाने के लिए हॉट मिक्स प्लांट की स्थापना संबंधी दूरी के मानकों में संशोधन किया गया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए माध्यमिक शिक्षा में कार्यरत विशेष शिक्षकों को नियमित करने का मानवीय फैसला भी लिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों के लिए नई सेवा नियमावली और सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को वित्त विभाग के अधीन लाने जैसे निर्णय यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्य की मशीनरी अधिक कार्यकुशलता के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।

