गैरसैंण/भराड़ीसैंण। उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा सत्र के पहले ही दिन खानपुर विधायक उमेश कुमार के बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। उमेश कुमार ने विधायकी से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। साथ ही उन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर लड़ाई लड़ने के लिए अपना नया राजनीतिक दल बनाने की संभावना भी जताई है।
ईटीवी भारत से खास बातचीत में उमेश कुमार ने कहा कि वह पिछले साढ़े चार साल से विपक्ष से उम्मीद लगाए बैठे थे कि भ्रष्टाचार, जनता और किसानों से जुड़े मुद्दों पर उनका साथ मिलेगा, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि अब उन्हें लगता है कि अपने क्षेत्र और हरिद्वार जनपद के लोगों की आवाज उठाने के लिए उन्हें खुद ही आगे बढ़ना होगा।
‘विपक्ष ने निराश किया, अब अकेले लड़ने की स्थिति’
उमेश कुमार ने बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से परेशान और दुखी हैं। उनके मुताबिक, जिस जनपद से वह आते हैं, उसके मुद्दों पर भी सदन में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष भ्रष्टाचार, किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर साथ देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब वह सदन में अपने समर्थकों और जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहते हैं, ताकि हरिद्वार के लोगों की समस्याओं को मजबूती से उठा सकें।
उत्तराखंड में नई पार्टी बनाने की तैयारी?
नई पार्टी बनाने के सवाल पर उमेश कुमार ने कहा कि वह इस दिशा में प्रयास करेंगे। यदि लोग उनके साथ जुड़ते हैं और उन्हें लगता है कि वह महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर आवाज उठा सकते हैं, तो वह राजनीतिक दल बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उमेश कुमार ने यह भी कहा कि उनकी योजना आगामी विधानसभा चुनाव में करीब 8 से 10 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की है। जिन क्षेत्रों से लोग उनसे संपर्क करेंगे, वहां जाकर वह जनता के बीच अपनी बात रखेंगे।
सभी दलों को मौका मिला, अब बदलाव की कोशिश: उमेश कुमार
खानपुर विधायक के अनुसार, उत्तराखंड की जनता ने अलग-अलग राजनीतिक दलों को मौका दिया है, लेकिन उनके मुताबिक, अपेक्षित बदलाव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ना चाहते हैं और उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं।
उमेश कुमार के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजरें रहेंगी। हालांकि, इस्तीफे की घोषणा और नई पार्टी बनाने की योजना को लेकर आगे की आधिकारिक कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
अब सवाल यह है कि क्या उमेश कुमार वास्तव में विधायकी से इस्तीफा देंगे और क्या उत्तराखंड में एक नया राजनीतिक विकल्प सामने आएगा?
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