सनातन की तपस्वी परंपरा का वंदन; त्रिवेणी की रेती पर उमड़ा श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम
प्रयागराज। धर्म और अध्यात्म की पावन धरा प्रयागराज में मानवता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का एक अनुपम उदाहरण देखने को मिला। पावन त्रिवेणी संगम के तट पर पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा आयोजित विशेष शिविर में सनातन धर्म की अखंड तपस्वी परंपरा के संवाहक दंडी स्वामियों का पूजन कर उन्हें विदाई दी गई। इस अवसर पर न्यास द्वारा सैकड़ों दंडी साधुओं को कंबल, वस्त्र, चित्र, कपड़े के थैले और नकद दक्षिणा प्रदान कर सेवा का पुण्य लाभ अर्जित किया गया।

साधना का सम्मान, सेवा का भाव कड़ाके की ठंड और संगम की रेती पर कठिन साधना करने वाले दंडी स्वामियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए न्यास के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद लिया। दंडी साधु, जो अपने कठोर तप, अखंड ब्रह्मचर्य और अनुशासित संन्यास जीवन के लिए विख्यात हैं, उन्हें आवश्यक सामग्री के साथ नकद दक्षिणा भी भेंट की गई। न्यास का यह प्रयास न केवल उनकी दैनिक आवश्यकताओं (औषधि, यात्रा और अल्पाहार) में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि समाज में त्याग और वैराग्य के प्रति सम्मान को भी सुदृढ़ करेगा।

अक्षय पुण्य की प्राप्ति धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए आयोजन से जुड़े श्रद्धालुओं ने कहा कि संगम क्षेत्र में संन्यासियों और तपस्वियों को किया गया दान श्अक्षयश् फल प्रदान करता है। दंडी स्वामियों को दिए गए कंबल और वस्त्र इस शीत ऋतु में उनकी साधना को सुगम बनाएंगे। कार्यक्रम के दौरान वितरित किए गए कपड़े के थैले और अन्य उपयोगी वस्तुओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सादगी का संदेश भी दिया गया।
संपूर्ण संगम तट वेद मंत्रों और श्रद्धा के भाव से सराबोर रहा। न्यास के इस सेवा कार्य ने न केवल साधुओं की बुनियादी जरूरतों में सहयोग किया, बल्कि दानकर्ता और समाज के बीच करुणा, विनम्रता और आत्मिक शांति के भाव को भी प्रगाढ़ किया। शांत और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ यह कार्यक्रम सनातन संस्कृति की सेवा परंपरा को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।

