51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन,प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद ऐतिहासिक आंकड़ा
उत्तराखण्ड सत्य, देहरादून
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रें में स्थित चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट अब शीतकालीन अवकाश के लिए बंद हो चुके हैं। इसके साथ ही वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा भी ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ अपने समापन पर पहुंची है। इस वर्ष यात्रा के दौरान प्राकृतिक आपदाओं ने कई बार चुनौती पेश की, पर्वतीय मार्ग दिनों तक बाधित रहे, मौसम ने परीक्षण लिए, लेकिन इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या ने नया कीर्तिमान बनाया। चारधाम के दर्शनों के लिए पहुंचे तीर्थयात्रियों की कुल संख्या 51 लाख 04 हजार 975 दर्ज की गई, जो उत्तराखंड के तीर्थाटन इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 4 लाख 35 हजार 901 अधिक श्रद्धालु चारधाम पहुंचे। वर्ष 2024 में कुल 46 लाख 69 हजार 074 तीर्थयात्रियों ने यात्रा की थी। इस वृद्धि ने न केवल उत्तराखंड की धार्मिक पर्यटन क्षमता को प्रमाणित किया है, बल्कि यात्रा प्रबंधन में सरकार के बेहतर समन्वय और सुरक्षा रणनीतियों की भी पुष्टि की है। इस बार यात्रा में सर्वाधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे, जहां 17 लाख 68 हजार 795 लोगों ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए। धाम की दुर्गम राह, ऊंचाई और कठोर मौसम के बावजूद यहां आने वालों की संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है। बदरीनाथ धाम में 16 लाख 60 हजार 224 श्रद्धालु पहुंचे, जहां कपाट बंद होने के अंतिम दिनों तक भी श्रद्धालुओं की भीड़ निरंतर बनी रही। गंगोत्री धाम में 7 लाख 57 हजार 010 और यमुनोत्री में 6 लाख 44 हजार 505 तीर्थयात्राी पहुंचे। धामों के अलावा हेमकुंट साहिब में भी इस वर्ष अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। पहली बार हेमकुंट साहिब में श्रद्धालुओं की संख्या 2 लाख 74 हजार 441 तक पहुंची, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले दो वर्षों में यह संख्या क्रमशः 1-64 लाख और 1-85 लाख रही थी, जो इस वर्ष की वृद्धि को विशेष बनाती है। चारधाम यात्रा 2025 को चुनौतियों का वर्ष भी कहा जा सकता है। इस यात्रा सीजन में कई बार भारी बारिश, भू-स्खलन और मार्ग अवरोध जैसी परिस्थितियों ने तीर्थयात्रियों की परीक्षा ली। केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग कई-कई दिनों तक बाधित रहे। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में बार-बार भूस्खलन की घटनाएँ सामने आईं, जिनके कारण यात्रियों को सुरक्षित आश्रयों में रुकना पड़ा, प्रशासन को लगातार राहत और पुनःस्थापना कार्यों में जुटना पड़ा। इसके बावजूद तीर्थयात्रियों का उत्साह कम नहीं हुआ। यात्रा को पुनः सुचारु करने में सरकार, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शासन स्तर की सतर्कता और डेडिकेटेड डिजास्टर रिस्पॉन्स मॉडल ने यात्रा को बड़े संकटों से सुरक्षित निकाला। इस बार चारधाम यात्रा में सरकार ने बेहतर प्रबंधन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यात्रा मार्गों पर ड्रोन सर्विलांस, ई-बुकिंग, हेल्पलाइन इंटीग्रेशन और मेडिकल रेस्पांस यूनिट को सुदृढ़ किया गया। भीड़ नियंत्रण के लिए धामों के प्रवेश और निकास मार्गों पर विशेष व्यवस्था की गई। मानसून अवधि में ‘यात्रा रोकने’ और ‘यात्रा पुनः प्रारंभ करने’ की नीति को वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया। मौसम विभाग के अलर्ट पर तुरंत निर्णय लेते हुए प्रशासन ने हजारों यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इन प्रयासों के कारण दुर्घटना की संभावनाओं में भारी कमी आई। चारधाम यात्रा के समापन के साथ ही शीतकालीन यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। परंपरागत रूप से जहां धामों के कपाट बंद होने के बाद उनकी पूजा-आराधना शीतकालीन प्रवास स्थलों पर की जाती है, वहीं इस बार राज्य सरकार इन स्थलों को पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। बदरीनाथ भगवान की पूजा पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ में होगी। बाबा केदारनाथ की शीतकालीन पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न कराई जाएगी। मां गंगा की शीतकालीन पूजा मखबा और मां यमुना की पूजा खरसाली में होगी। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं शीतकालीन यात्रा के दौरान मां गंगा के प्रवास स्थल मखबा पहुंचे थे, जिसने इन स्थलों की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके बाद से राज्य सरकार शीतकालीन यात्रा को सशक्त और आकर्षक बनाने के लिए व्यापक योजना पर काम कर रही है। पर्यटन विभाग शीतकालीन यात्रा को एडवेंचर टूरिज्म से जोड़कर नए सर्किट तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। चारधाम यात्रा 2025 के रिकॉर्ड आंकड़े केवल आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसरों का संकेत भी हैं। प्रतिवर्ष बढ़ती संख्या राज्य की आर्थिक संरचना को मजबूत कर रही है। स्थानीय व्यवसाय, परिवहन, होटल उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सभी पर इसका लाभकारी प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है। राज्य सरकार अब पारंपरिक पहाड़ी पर्यटन से आगे बढ़ते हुए ‘सालभर पर्यटन’ की अवधारणा पर जोर दे रही है। इससे न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि आपदा काल में पर्यटन पर निर्भर समुदायों के लिए भी स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

