अजय चड्डा,रूद्रपुर
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘देवभूमि परिवार योजना’ को पूरे प्रदेश में लागू करने का फैसला किया है। यह योजना न केवल प्रशासनिक सुधार का आधार बनेगी, बल्कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण तंत्र को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। अब प्रदेश के हर परिवार को एक विशिष्ट फैमिली आईडी यानी परिवार पहचान पत्र मिलेगा, जिसके माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचाने में बड़ी आसानी होगी। सरकार का दावा है कि एकीकृत डेटा बेस तैयार होने से योजनाओं में फर्जीवाड़ा, डुप्लीकेसी और अपात्र लोगों द्वारा लाभ प्राप्त करने जैसी समस्याओं पर पूरी तरह विराम लगेगा। परिवार पहचान पत्र में परिवार के प्रत्येक सदस्य का विवरण, उनकी पात्रता और वे किन योजनाओं का लाभ ले रहे हैंकृयह सब डिजिटल रूप में दर्ज होगा। इससे सरकार को वास्तविक लाभार्थियों का स्पष्ट आंकड़ा प्राप्त होगा और भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा और भी सटीक बनाई जा सकेगी। अब तक कई बार यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि एक व्यक्ति कई योजनाओं का लाभ उठाता है, जबकि वास्तव में पात्र परिवार वंचित रह जाते हैं। देवभूमि परिवार योजना इन खामियों को दूर कर एक ऐसी प्रणाली तैयार करेगी, जिसमें यदि कोई पात्र परिवार किसी योजना से वंचित है, तो इसकी सूचना स्वतः पोर्टल के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचेगी। अधिकारी इसकी समीक्षा कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठा सकेंगे। इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी नियोजन विभाग को सौंपी गई है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र (छप्ब्) की तकनीकी साझेदारी से एक अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल तैयार किया गया है, जिसकी मदद से योजना का संचालन, आंकड़ों का विश्लेषण और निगरानी की जाएगी। विभाग में एक विशेष प्रकोष्ठ भी बनाया गया है, जिसमें योजनाकार और डेटा विश्लेषक तैनात किए गए हैं। यह टीम लगातार इस बात का अध्ययन करेगी कि योजनाओं का लाभ किस गति से और किस गुणवत्ता के साथ परिवारों तक पहुंच रहा है। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे सरकार को प्रदेश में बेरोजगारों, किसानों, गरीब परिवारों, और विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सटीक संख्या का रियल टाइम डेटा मिलेगा। यह आंकड़े न केवल जनकल्याणकारी योजनाओं बल्कि निर्वाचन, सहकारिता, कृषि, उद्योग, शहरी विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण जैसे विभागों के लिए भी आधारभूत साबित होंगे। बार-बार सर्वे कराने की जरूरत खत्म होगी, क्योंकि सभी जानकारी परिवार पहचान पत्र के माध्यम से सुरक्षित और अद्यतन रहेगी। सरकार का मानना है कि देवभूमि परिवार योजना उत्तराखंड को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ले जाएगी। योजनाओं का लाभ अब बिना किसी कागजी झंझट, बिना मध्यस्थ और बिना किसी गड़बड़ी के सीधे पात्र परिवारों तक पहुंचेगा। साथ ही राज्य का प्रशासनिक ढांचा डिजिटल और पारदर्शी बनेगाकृजो भविष्य में रोजगार, उद्यम, विकास योजनाओं और नीति निर्माण के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा।इसी बीच हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। सात हजार से अधिक संविदा, तदर्थ और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी करने की मंजूरी दी गई है। यह फैसला न केवल हजारों परिवारों को स्थायित्व प्रदान करेगा, बल्कि सरकार की दीर्घकालिक स्थिरता और समावेशी विकास की नीति को भी मजबूती देता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो देवभूमि परिवार योजना उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह योजना न केवल सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाएगी, बल्कि हर परिवार को उसका अधिकार सुनिश्चित कर प्रदेश के विकास में नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करेगी।
कैमिली आईडी से बदलेगा सेवा वितरण का भविष्य
देहरादून। देवभूमि परिवार योजना का सबसे बड़ा प्रभाव ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रें में देखने को मिलेगा, जहाँ अक्सर पात्र परिवार जानकारी के अभाव या दस्तावेजी दिक्कतों के कारण योजनाओं से वंचित रह जाते थे। फैमिली आईडी बनने के बाद किसी भी परिवार को बारदृबार दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे। एक बार डेटा अपडेट होने पर स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन कार्ड, रोजगार, सामाजिक सुरक्षाकृहर योजना का लाभ स्वतः जोड़ जाएगा।अधिकारियों को भी तत्काल पता चलेगा कि कौन-सा परिवार किन योजनाओं से वंचित है। इससे न केवल लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि सरकारी संसाधनों का उपयोग भी बेहतर तरीके से होगा।डिजिटल सत्यापन और डुप्लीकेसी खत्म होने से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रदेश में फ्वन फेमिली, वन रिकॉर्डय् की अवधारणा पूरी तरह से साकार होगी। जो उत्तराखंड प्रशासन की कार्यशैली में बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।

