कांग्रेस पर लगाया बंगाली समाज के नाम पर वर्षों की उपेक्षा और भ्रम फैलाने का आरोप
उत्तराखण्ड सत्य,रूद्रपुर
विधायक शिव अरोरा ने अपने कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस पर बंगाली समाज के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई दिनों से पार्टी संगठन के निर्देश पर बिहार चुनाव में व्यस्त थे, लेकिन इसी बीच कांग्रेस नेताओं ने बंगाली समाज को भ्रमित करने का प्रयास शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने बंगाली समाज के हितों के लिए कभी कोई ठोस प्रयास नहीं किया, जबकि यह समाज हमेशा हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का मजबूत आधार रहा है।विधायक अरोरा के अनुसार बंगाली समाज की लंबे समय से चली आ रही अनुसूचित जाति दर्जे की मांग को भाजपा सरकारों ने ही गंभीरता से उठाया है। उन्होंने बताया कि 2007 में खंडूरी सरकार ने पंतनगर में सर्वे करवाकर अनुसूचित जाति का दर्जा बहाल कराने का प्रस्ताव तैयार कर 2008 में तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, सांसद व स्थानीय विधायक इस प्रस्ताव को पारित करवाने में पूरी तरह विफल रहे। अरोरा ने कहा कि वर्ष 2024 में उनके आग्रह पर बंगाली समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर पुनः अनुसूचित जाति दर्जे के लिए प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने इस मांग को स्वीकार करते हुए 12 फरवरी 2024 को प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजा, जिसे आयोग ने 14 फरवरी को केंद्र सरकार के पास अग्रेषित कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि 1992 में सांसद रहे बलराज पासी और पूर्व में नैनीतालदृऊधमसिंह नगर से सांसद अजय भट्टð ने भी संसद में इस विषय को मजबूती से उठाया था, जो दर्शाता है कि भाजपा ने हमेशा बंगाली समाज के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने किच्छा विधायक पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे किस नैतिक अधिकार से बंगाली समाज के हितैषी होने का दावा कर रहे हैं, जबकि वे रुद्रपुर क्षेत्र से 20 वर्ष विधायक और एक बार मंत्री भी रहे, फिर भी उन्होंने समाज की समस्याओं का समाधान कराने के लिए कोई पहल नहीं की। अरोरा ने पूछा कि यदि वे वास्तव में चिंतित थे तो उनके प्रयास क्यों दिखाई नहीं देते, और आिखर बंगाली समाज की समस्या आज तक क्यों बनी हुई है। अरोरा ने गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान विधायक मुन्ना सिंह चौहान द्वारा बंगाली समाज पर दिए गए विवादित बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कर दिया था कि यह उनका निजी विचार है। वर्तमान बयान भी व्यक्तिगत है और इसका भाजपा या सरकार से कोई संबंध नहीं है। विधायक अरोरा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की और बंगाली समाज की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक इस समाज के दस्तावेजों में फ्पूर्वी पाकिस्तानय् जैसा कलंकित शब्द दर्ज रहता था, लेकिन कांग्रेस ने इसे हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। जबकि भाजपा सरकार ने उनके आग्रह पर इस शब्द को सरकारी दस्तावेजों से हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि रुद्रपुर में बंग भवन निर्माण की वर्षों पुरानी मांग को भी भाजपा सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर धनराशि जारी कर दी है। इसके साथ ही हरि चंददृगुरुचंद स्मृति छात्रवृत्ति कोष को पुनः प्रारम्भ कर दो करोड़ रुपये की धनराशि बंगाली विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा हेतु जारी की गई है। अरोरा ने कहा कि उनके आग्रह पर इतिहास में पहली बार रुद्रपुर में विभाजन विभीषिका सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बंगाली समाज के बुजुर्गों को मुख्यमंत्री धामी और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भाजपा की संवेदन शीलता और समर्पण का प्रतीक है, जबकि कांग्रेस कभी ऐसा साहस नहीं जुटा सकी क्योंकि उसे अपने मुस्लिम वोट बैंक के नाराज होने का डर रहता था। विधायक अरोरा ने कहा कि भाजपा सदैव बंगाली समाज की हितैषी रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने किच्छा विधायक से प्रश्न पूछते हुए कहा कि वे बताएं कि उनके कार्यकाल में बंगाली समाज के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए गए, क्योंकि अब केवल बयानबाजी और भ्रम फैलाने से काम नहीं चलेगा। पत्रकार वार्ता में बंगाली महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार साह, पूर्व मंडी अध्यक्ष केके दास, भाजपा जिला महामंत्री तरुण दत्ता, मानवेन्द्र राय, गोविन्द राय, गणेश सरकार, शिवकुमार राय, मुकेश मंडल, रोबिन विश्वास, विशाल शील, बलाई विश्वास सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

