फनामों में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 में उनकी घोषित संपत्ति करीब 4.16 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर लगभग 25.20 करोड़ रुपये हो गई। यानी दस वर्षों में घोषित संपत्ति में करीब 21.04 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इन आंकड़ों के आधार पर बढ़ोतरी लगभग 506 प्रतिशत बैठती है।
इस मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने संपत्ति में बढ़ोतरी और आय के स्रोतों की जांच की मांग उठाई है। वहीं, चुनावी हलफनामों में दर्ज विवरणों की तुलना और सत्यापन को लेकर भी सवाल सामने आ रहे हैं। हालांकि, संपत्ति में बढ़ोतरी अपने आप में किसी गलत काम का प्रमाण नहीं है। इसके कारणों का आकलन संबंधित वित्तीय दस्तावेजों और आय के स्रोतों की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
2012 से 2022 तक कितना बढ़ी संपत्ति?
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के चुनावी आंकड़ों पर आधारित MyNeta के रिकॉर्ड में रेखा आर्य की घोषित संपत्ति का विवरण इस प्रकार है:
| वर्ष | चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्ति |
|---|---|
| 2012 | ₹4.16 करोड़ |
| 2014 उपचुनाव | ₹6.72 करोड़ |
| 2017 विधानसभा चुनाव | ₹12.78 करोड़ |
| 2022 विधानसभा चुनाव | ₹25.20 करोड़ |

इन आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2022 के बीच उनकी घोषित संपत्ति में करीब 12.42 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। वहीं, 2012 से 2022 के बीच यह बढ़ोतरी लगभग 506 प्रतिशत रही।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये अलग-अलग चुनावों में दाखिल किए गए हलफनामों में घोषित संपत्ति के आंकड़े हैं। इन्हें वर्तमान संपत्ति का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
हरक सिंह रावत ने उठाई जांच की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने रेखा आर्य की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हरक सिंह रावत का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति और उनकी आय के स्रोतों की जांच राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर होनी चाहिए। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और विभागों में कथित अनियमितताओं के मामलों का भी उल्लेख करते हुए जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
उन्होंने मांग की है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि की संपत्ति को लेकर सवाल उठते हैं, तो संबंधित दस्तावेजों और आय के स्रोतों की जांच की जानी चाहिए।
महत्वपूर्ण: हरक सिंह रावत की ओर से लगाए गए आरोप और जांच की मांग उनके बयान हैं। इनसे अपने आप भ्रष्टाचार साबित नहीं होता।
पति के आरोपों के बाद भी चर्चा में आया संपत्ति का मामला
रेखा आर्य की संपत्ति का मुद्दा उस समय और चर्चा में आया, जब उनके पति गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर उन पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया। साहू ने इस मामले की जांच की मांग भी की थी।
दूसरी ओर, रेखा आर्य ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के संबंध में पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। इस तरह यह मामला व्यक्तिगत विवाद के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।
पति की ओर से संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों को चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति के आंकड़ों से अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध हलफनामों में दर्ज लगभग 25.20 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति और कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति का दावा दो अलग-अलग बातें हैं।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने बताया संपत्ति के आकलन का तरीका
अधिवक्ता विकेश नेगी ने चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति की तुलना को महत्वपूर्ण बताया है। इस तरह के तुलनात्मक अध्ययन में किसी उम्मीदवार के अलग-अलग चुनावों के हलफनामों में घोषित चल और अचल संपत्ति, देनदारियों, आय तथा अन्य उपलब्ध वित्तीय विवरणों का अध्ययन किया जा सकता है।
किसी जनप्रतिनिधि की संपत्ति में वृद्धि का आकलन करते समय केवल वेतन को आधार बनाना पर्याप्त नहीं होता। संपत्ति खरीद, व्यवसाय, निवेश, विरासत, कर्ज और अन्य वैध वित्तीय स्रोतों की भी जांच आवश्यक हो सकती है।
इसीलिए संपत्ति में वृद्धि से जुड़े सवालों का निष्पक्ष उत्तर देने के लिए संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण है।
क्या चुनावी हलफनामों के आंकड़ों में अंतर है?
उपलब्ध MyNeta रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2022 के चुनावी हलफनामे में रेखा आर्य की कुल घोषित संपत्ति 25,20,18,003 रुपये दर्ज है। इसमें चल संपत्ति 8,19,18,003 रुपये और अचल संपत्ति 17,01,00,000 रुपये दिखाई गई है। दोनों का जोड़ भी 25,20,18,003 रुपये ही होता है।
इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर कुल संपत्ति के जोड़ में अंतर होने का दावा पुष्ट नहीं होता। यदि किसी अन्य दस्तावेज या हलफनामे के पन्ने में अलग आंकड़े दर्ज होने की बात कही जा रही है, तो उसका मूल दस्तावेज से मिलान करना जरूरी होगा।
अब क्या हैं प्रमुख सवाल?
रेखा आर्य की घोषित संपत्ति में पिछले चुनावों के दौरान हुई बढ़ोतरी के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं:
- अलग-अलग वर्षों में घोषित संपत्ति में वृद्धि किन वित्तीय स्रोतों से हुई?
- क्या सभी संबंधित हलफनामों और दस्तावेजों का तुलनात्मक सत्यापन किया गया है?
- कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं?
- संपत्ति से जुड़े आरोपों पर संबंधित मंत्री का आधिकारिक पक्ष क्या है?
इन सवालों के जवाब के लिए मूल हलफनामों, वित्तीय दस्तावेजों और किसी भी आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
निष्कर्ष
रेखा आर्य के चुनावी हलफनामों में दर्ज आंकड़े वर्ष 2012 से 2022 के बीच उनकी घोषित संपत्ति में बड़ी वृद्धि दिखाते हैं। कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने इस वृद्धि को लेकर जांच की मांग की है, जबकि पति की ओर से लगाए गए अलग आरोपों ने मामले को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल, संपत्ति में वृद्धि और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित आय के स्रोतों, मूल दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के परिणामों की पुष्टि आवश्यक होगी।
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