उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर धामी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब शिक्षा विभाग और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त मदरसों को शुक्रवार (जुमे) के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखना होगा। सरकार का कहना है कि मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के निर्धारित नियमों का पालन किया जाना जरूरी है।
मदरसे अब स्कूलों के नियमों के तहत करेंगे काम
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, पंजीकृत मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता मिलने के बाद उन्हें शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के नियमों के अनुरूप संचालन करना होगा। इसी व्यवस्था के तहत शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने की बात कही गई है।
मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था में बदलाव के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों में निर्धारित शैक्षिक मानकों और पाठ्यक्रम संबंधी नियमों को लागू करना है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले उत्तराखंड में 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। इनमें से दोबारा आवेदन करने वाले 76 मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है, जबकि 114 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग के पास लंबित बताए गए हैं।
ऊधम सिंह नगर के 24 मदरसों को मिली मान्यता
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है। इनमें ऊधम सिंह नगर जिले के 119 मदरसों में से 24 को मान्यता मिलने की जानकारी दी गई है। देहरादून में 41 में से 6, हरिद्वार में 270 में से 44 और नैनीताल में 18 में से 2 मदरसों को मान्यता मिली है।
अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर कार्रवाई
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, सरकार ने पहले चरण में 250 ऐसे मदरसों को सील किया था, जो मदरसा बोर्ड में भी पंजीकृत नहीं थे। सरकार का कहना है कि निर्धारित अनुमति और मान्यता के बिना शिक्षण संस्थानों का संचालन नियमों के अनुरूप नहीं है।
मुख्यमंत्री धामी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षा व्यवस्था पर कहा है कि सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए और शिक्षण संस्थानों को सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। उनके अनुसार, नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को राज्य में संचालित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
USTV Rudrapur की नजर: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच शुक्रवार के बजाय रविवार को अवकाश का नियम चर्चा में है। संबंधित संस्थानों के लिए लागू नियमों और मान्यता की स्थिति को समझना महत्वपूर्ण होगा।
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