रुद्रपुर/पंतनगर। मानव तस्करी जैसे गंभीर और संगठित अपराध की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास तथा दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड पुलिस ने पंतनगर स्थित गांधी हॉल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में आयोजित इस सम्मेलन में उत्तराखंड समेत छह राज्यों के पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय एजेंसियों, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के कुल 134 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
छह राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
सम्मेलन में उत्तराखंड के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें पुलिस अधिकारियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों, अभियोजन, श्रम एवं बाल कल्याण विभागों, गैर-सरकारी संगठनों और बाल कल्याण समितियों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
सम्मेलन का उद्घाटन अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखंड वी. मुरुगेशन ने किया। इस दौरान पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था धीरेंद्र गुंज्याल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर अजय गणपति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मानव तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करने पर जोर
सम्मेलन में मानव तस्करी के बदलते स्वरूप, अपराधियों के नए तौर-तरीकों और अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर और संगठित अपराध है। इसकी रोकथाम के लिए पुलिस के साथ-साथ सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने और पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों, साक्ष्य आधारित विवेचना, प्रभावी अभियोजन और मानव तस्करी के मामलों में पीड़ितों की समय पर पहचान सुनिश्चित करने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास को प्राथमिकता
मानव तस्करी के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, कानूनी एवं सामाजिक सहायता देना और उनके पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करना भी जरूरी है।
सम्मेलन में विशेष रूप से बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की समयबद्ध पहचान, सुरक्षित बचाव तथा बाल कल्याण समितियों और संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करने पर चर्चा हुई। साथ ही पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल बनाकर दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
हरिद्वार पुलिस ने साझा किए दो महत्वपूर्ण मामलों के उदाहरण
सम्मेलन में हरिद्वार पुलिस ने दो महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी साझा की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद किया गया और पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया।
इन दोनों मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती घंटों के दौरान सक्रियता और विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी में अहम साबित हो सकता है।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मी सम्मानित
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन को विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा मानव तस्करी के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
पंतनगर में आयोजित इस सम्मेलन के माध्यम से मानव तस्करी के नेटवर्क की पहचान, पीड़ितों के संरक्षण एवं पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई के लिए समन्वित प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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