मुख्यमंत्री की 3980 घोषणाओं में से 2535 पर लगी मुहर, सुस्त रफ्तार वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। सत्ता के गलियारों में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है और भारतीय जनता पार्टी इस बार अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में है। इस रणनीति का केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई जनहित की घोषणाएं हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में, गुरुवार को मुख्यमंत्री ने मैराथन बैठकें कर अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए कि विकास कार्यों में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जुलाई 2021 में सत्ता की कमान संभालने के बाद से 9 अप्रैल 2026 तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विकास के लिए कुल 3980 घोषणाएं की हैं। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से 2535 घोषणाओं (लगभग 63-69 प्रतिशत) का शासनादेश जारी हो चुका है, जो सरकार की कार्यक्षमता को दर्शाता है। वर्तमान में 982 घोषणाओं पर काम युद्धस्तर पर जारी है, जबकि 399 घोषणाएं अभी अपूर्ण की श्रेणी में हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय इन आंकड़ों पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि चुनाव से पहले लंबित कार्यों का प्रतिशत न्यूनतम किया जा सके। लोक निर्माण विभाग मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर नजर आ रहा है। कुल 816 घोषणाओं के साथ यह विभाग विकास की धुरी बना हुआ है, जिसमें से 679 का शासनादेश जारी कर सड़कों और पुलों के जाल को मजबूती दी गई है। आंकड़ों का एक दिलचस्प पहलू यह है कि मुख्यमंत्री ने सबसे अधिक घोषणाएं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के विभागोंकृजैसे लोक निर्माण, सिंचाई और पर्यटनकृके लिए की हैं। इन विभागों से जुड़ी कुल 1913 घोषणाओं में से 1291 को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। सिंचाई विभाग और शहरी विकास विभाग में भी क्रमशः 266 और 220 घोषणाओं पर मुहर लगाकर ग्रामीण और शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की कोशिश की गई है। हालिया समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री का रुख कड़ा नजर आया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी कार्य के लिए प्रस्ताव एक विभाग से दूसरे विभाग को हस्तांतरित होना है, तो इसमें अनावश्यक देरी न की जाए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जन समस्याओं का समाधान सरकार का मुख्य एजेंडा है और इसमें हीलाहवाली करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश देते हुए धामी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि 2027 की चुनावी जंग में सरकार अपनी सक्रियता और पारदर्शिता को ही सबसे बड़ा हथियार बनाएगी।
आंकड़ों की कसौटी पर विकास का रिपोर्ट कार्ड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जुलाई 2021 से अप्रैल 2026 तक के कार्यकाल का विश्लेषण करें तो विकास की एक स्पष्ट तस्वीर उभरती है। इस अवधि में की गई कुल 3980 घोषणाओं में से 2535 का शासनादेश जारी होना सरकार की सक्रियता को प्रमाणित करता है। विशेष रूप से लोक निर्माण विभाग में की गई 816 घोषणाओं में से 679 पर काम शुरू होना राज्य की सड़कों और बुनियादी ढांचे के प्रति गंभीरता दर्शाता है। इसी तरह सिंचाई विभाग की 412 में से 266 और शहरी विकास की 303 में से 220 घोषणाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। यह आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के विभागों से संबंधित सर्वाधिक 1913 घोषणाएं की गई हैं, जिनमें से 1291 धरातल पर उतरने की प्रक्रिया में हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवशेष 982 गतिमान कार्यों और आंशिक रूप से रुकी हुई परियोजनाओं को बिना किसी विभागीय देरी के पूर्ण किया जाए। फाइलों के हस्तांतरण में सुस्ती दिखाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर रुख अपनाते हुए अब सीधे जवाबदेही तय करने की तैयारी है ताकि चुनाव से पूर्व विकास का लक्ष्य शत-प्रतिशत प्राप्त किया जा सके।

