देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक संवेदनशीलता के संदर्भ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का परेड ग्राउंड में आंदोलनरत युवाओं के बीच सीधे पहुँच जाना एक प्रतीकात्मक घटना से कहीं अधिक है। यह कदम न सिर्फ सरकार की पारदर्शी नीयत का प्रमाण है, बल्कि यह साफ संदेश भी देता है कि शासन युवाओं को सिर्फ आंकड़ों या बयानों से नहीं, बल्कि संवाद और सहानुभूति से साधना चाहता है। पिछले सप्ताह आयोजित अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा को लेकर उठ रहे प्रश्नों ने युवाओं के मन में असमंजस और आक्रोश पैदा किया था। ऐसे समय में मुख्यमंत्री धामी का बिना किसी औपचारिक घोषणा के धरना स्थल पर पहुँचना बताता है कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक दूरी से नहीं, भावनात्मक नजदीकी से देख रहे हैं। उन्होंने न केवल युवाओं की बात सुनी, बल्कि सीबीआई जांच की उनकी मांग को स्वीकारते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार पारदर्शिता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने पच्चीस हजार से अधिक नियुक्तियाँ निश्पक्ष और बिना विवाद के पूरी कराई हैं। यदि एक परीक्षा प्रकरण पर संदेह की स्थिति बनी है तो सरकार युवाओं के मन से यह संदेह भी मिटाना चाहती है। यह बात उन अभ्यर्थियों को आश्वस्त करती है जो अपने भविष्य और परिश्रम को लेकर सहजता चाहते हैं। सीएम धामी ने युवाओं के संघष र्काे त्योहारी समय और गर्म मौसम के बीच सक्रिय रहने की दृष्टि से संवेदनशीलता से देखा और माना कि उन्हें भी यह स्थिति संतोष जनक नहीं लगती। उन्होंने यह भी स्वीकारा कि संवाद चाहें कार्यालय में हो सकता था, लेकिन युवाओं के कष्ट को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने खुद धरना स्थल पर पहुंचना उचित समझा। यह पहल किसी औपचारिकता से अधिक उस नेतृत्व की पहचाना है जो दूरी घटाने में विश्वास रखता है। मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की निगरानी में चल रही एस आईटी जांच का उल्लेख करते हुए भी कहा कि यदि युवाओं को सीबीआई पर अधिक भरोसा है तो सरकार उसके लिए भी तैयार है। यह वक्तव्य केवल राजनीतिक समाधान नहीं बल्कि युवाओं की मानसिक सुरक्षा को महत्व देने वाली एक प्रशासनिक दृष्टि है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री द्वारा आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने की बात भी युवाओं के साथ खड़े होने का संकेत देती है। अमृतकाल में उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का जो विजन मुख्यमंत्री धामी ने सामने रखा, उसमें युवाओं को परिवर्तन और विकास की धुरी बताया गया। यह बात सरकार की प्राथमिकताओं और नीतिगत दिशा को स्पष्ट करती है। जिस सधी हुई भाषा और भावुक अभिव्यक्ति के साथ उन्होंने युवाओं को संबोधित किया, वह उन्हें एक सामान्य राजनेता नहीं, बल्कि समझदार और सहभागी नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करता है। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम बताता है कि संवेदनशील मुद्दों पर धामी का दृष्टिकोण टकराव या टालमटोल का नहीं, बल्कि संवाद, निर्णय और विश्वास निर्माण का है। धरना स्थल पर उनका पहुँचना और सीबीआई जांच की घोषणा यह दर्शाती है कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के भविष्य के सवालों पर सजग, प्रतिबद्ध और उत्तरदायी है।
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